नई दिल्ली: Asia Cup में भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) के बीच हालिया मैच ने सिर्फ खेल का रोमांच ही नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव को भी उजागर कर दिया। इस बार का टूर्नामेंट परंपरागत मुकाबलों से अलग था, जिसने दोनों देशों के क्रिकेट (Cricket Controversy) भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
द्विपक्षीय मैचों का अभाव और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट
भारत और पाकिस्तान कई सालों से द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं खेलते। दोनों टीमें आमतौर पर एशिया कप, टी-20 विश्व कप, वनडे विश्व कप और आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी (ICC Champions Trophy) जैसे बहुराष्ट्रीय आयोजनों में ही आमने-सामने आती हैं। इस बार का टूर्नामेंट भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा, लेकिन राजनीतिक घटनाओं और कूटनीतिक विवादों ने इसे अलग मोड़ दे दिया।
भारत ने हाथ नहीं मिलाया
एशिया कप में दुबई और शारजाह में हुए लीग मैच में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में पाकिस्तान के खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया। कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ खड़ा होने की बात कही। इस कदम से नाराज पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने मैच रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट को हटाने की मांग की और यदि ऐसा न हुआ तो यूएई के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की धमकी दी।
विवादास्पद हाव भाव और ट्रॉफी विवाद
सुपर-4 राउंड के दौरान पाकिस्तान के हारिस रऊफ, फहीम अशरफ और साहिबजादा फरहान ने भारतीय टीम के खिलाफ विवादास्पद और भड़काऊ हावभाव दिखाए। टूर्नामेंट के अंत में भारत ने पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष नकवी ट्रॉफी लेकर चले गए।
विजेता होने के बावजूद भारतीय टीम को अभी तक ट्रॉफी नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक ट्रॉफी एसीसी के दुबई कार्यालय में रखी गई है।
क्रिकेट अब कूटनीति का माध्यम नहीं
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल अथर्टन ने अपने कॉलम में लिखा कि क्रिकेट अब केवल खेल नहीं बल्कि राजनीतिक और आर्थिक हितों का जरिया बन गया है। उन्होंने बड़े टूर्नामेंट में ग्रुप मैचों को जानबूझकर तय करने की प्रथा खत्म करने और भविष्य के आईसीसी आयोजनों में पारदर्शी ड्रॉ अपनाने की मांग की।
भारत की विजय और अंतरराष्ट्रीय संदेश
28 सितंबर को दुबई में हुए फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराया। इस टूर्नामेंट में दोनों टीमों की तीन भिड़ंतें हुईं, जिनमें भारत ने सभी मैच जीते। अथर्टन ने लिखा कि आर्थिक और कूटनीतिक कारणों से भारत-पाकिस्तान मैच तय किए जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान में दोनों देशों के संबंध बिगड़ रहे हैं, इसलिए ऐसे मैच जानबूझकर आयोजित करना उचित नहीं।
बीसीसीआई अधिकारियों का मानना है कि यह बात करना आसान है, लेकिन प्रायोजक और प्रसारणकर्ता इसके लिए तैयार होंगे या नहीं, यह बड़ी चुनौती है। वर्तमान स्थिति में अगर कोई बड़ी टीम टूर्नामेंट से हटती है, तो प्रायोजन और आयोजन कठिन हो जाएंगे।
एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मुकाबला अब सिर्फ खेल का मुद्दा नहीं रह गया। यह राजनीतिक तनाव, कूटनीति और खेल प्रबंधन की जटिलताओं का प्रतीक बन गया है। भविष्य में इन मैचों की आयोजना पर फिर से विचार करना आवश्यक नजर आता है।



