एक नई रिसर्च ने चेतावनी दी है कि 30–40 की उम्र में Vitamin D की कमी सिर्फ हड्डियों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह दिमाग़ की सेहत पर भी गहरा असर डाल सकती है। अध्ययन के मुताबिक, युवावस्था या मध्य आयु में Vitamin D का कम स्तर आगे चलकर ब्रेन एजिंग को तेज़ कर सकता है।
टाऊ प्रोटीन से जुड़ा अहम संकेत
रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में Vitamin D का स्तर कम होता है, उनमें Tau Protein का स्तर अधिक पाया जाता है। यह प्रोटीन दिमाग़ की कोशिकाओं में असामान्य रूप से जमा होने लगता है और Dementia और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ा होता है।

मिडल एज है सबसे अहम समय
विशेषज्ञों का कहना है कि 30–40 की उम्र वह समय है जब शरीर और दिमाग़ दोनों में बदलाव शुरू होते हैं।
यदि इस समय Vitamin D की कमी हो, तो इसका असर बाद की उम्र में याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ सकता है।
सिर्फ हड्डियों के लिए नहीं, दिमाग़ के लिए भी ज़रूरी
अक्सर Vitamin D को केवल कैल्शियम अवशोषण और हड्डियों की मजबूती से जोड़ा जाता है, लेकिन यह—
- इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है
- शरीर में सूजन (inflammation) को नियंत्रित करता है
- और दिमाग़ के कार्य (brain function) को बेहतर बनाता है
यानी इसकी कमी का असर पूरे शरीर, खासकर दिमाग़ पर पड़ सकता है।
क्यों बढ़ रही है Vitamin D की कमी?
आजकल की जीवनशैली में लोग—
- धूप में कम समय बिताते हैं
- ज़्यादातर समय घर या ऑफिस में रहते हैं
- स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है
इन कारणों से शरीर को प्राकृतिक रूप से Vitamin D नहीं मिल पाता।
कैसे रखें Vitamin D का स्तर सही?
विशेषज्ञ कुछ आसान उपाय बताते हैं
- रोज़ाना 15–20 मिनट धूप लें
- दूध, अंडा, मछली जैसे Vitamin D युक्त आहार लें
- ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें
यह अध्ययन साफ संकेत देता है कि Vitamin D की कमी को हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है।
कम उम्र में ही इसकी कमी को दूर करना भविष्य में दिमाग़ से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है।



