भागलपुर: भागलपुर जिले में महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है। यहां घटक दलों ने दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं। जिले में सात विधानसभा सीट है। जिसमें दो सिट ऐसे जहां हमेशा कांग्रेस उम्मीदवार मैदान में होते थे, वहां इस बार राजद ने भी अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतार दिये हैं, कुल मिलाकर कहे तो पूरे जिले के चार विधानसभा सीट पर राजद ने उम्मीदवार खड़े किए हैं। पीरपैंती,कहलगांव, सुल्तानगंज और नाथनगर में राजद प्रत्याशी मैदान में है, लेकिन इसमें दो ऐसी सीट है कहलगांव और सुल्तानगंज जहां हमेशा कांग्रेस चुनाव मैदान में होते थे लेकिन इस बार यहां राजद ने भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया है। वहीं भागलपुर जिले में एनडीए ने डैमेज कंट्रोल कर लिया है।
कहलगांव सीट पर पहले राजद ने अपना उम्मीदवार झारखंड के मंत्री संजय यादव के पुत्र रजनीश यादव को बनाया तो नामांकन के अंतिम तिथि के दो दिन पहले कांग्रेस ने भी यहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रवीण कुशवाहा को टिकट देकर मैदान उतारा है। वही सुल्तानगंज में कांग्रेस के ललन यादव के खिलाफ चंदन सिन्हा को राजद ने उतारा है।
चार सीटों पर गठबंधन धर्म का हो रहा पालन
भागलपुर, गोपालपुर और बिहपुर में महागठबंधन ठीक दिख रहा है। भागलपुर में कांग्रेस, पीरपैंती में राजद तो उधर गोपालपुर और बिहपुर में वीआईपी मैदान में है। यहां सब कुछ ठीक है।इन चारों विधानसभा क्षेत्र में गठबंधन धर्म का पालन हुआ है। लेकिन बिहपुर में वीआईपी ने अपर्णा कुमारी को उम्मीदवार बनाया है, अपर्णा एक दिन पहले ही जदयू छोड़कर वीआईपी में शामिल हुई है. ऐसे में भीतर घात होने की संभावना है।वहीं गोपालपुर में डब्लू यादव को मुकेश सहनी ने उम्मीदवार बनाया है, डब्लू यादव की पत्नी गोपालपुर की प्रमुख है। बिहपुर में भाजपा विधायक इंजीनियर शैलेंद्र के खिलाफ मुख्य रूप से वीआईपी जन स्वराज है तो गोपालपुर में जदयू प्रत्याशी बूलो मंडल के खिलाफ वीआईपी और जन स्वराज के अलावा वर्तमान के विधायक गोपाल मंडल भी निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं।
एनडीए का कुनबा संभला
एनडीए का भी कुनबा कुछ दिनों के लिए बिखरता हुआ नजर आ रहा था लेकिन फिर संभल गया। भागलपुर सीट पर एनडीए से भाजपा प्रत्याशी रोहित पांडे के नाम की घोषणा होने के साथ ही बगावत के स्वर बुलंद हो गए थे। यहां पर सबसे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री के अश्वनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे में बगावत की तो फिर बिहार बीजेपी मीडिया पैनलिस्ट प्रीति शेखर भी बगावत पर उतर आई और दोनों ने नामांकन के लिए एनआर कटा लिया, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि नामांकन के लिए निकले अर्जित शाश्वत चौबे नामांकन स्थल पहुंच कर वापस लौट गए, तो वही प्रीति शेखर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मिलने के लिए बुला लिया, मुलाकात के साथ ही दोनों ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया और रोहित पांडे को अपना समर्थन दे दिया। हालांकि कहलगांव में मामला फंसा हुआ है यहां पिछले दफा भाजपा ने चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के प्रत्याशी सुभानंद मुकेश को पराजित कर भाजपा के पवन यादव ने कांग्रेस के 40 वर्ष के सत्ता को समाप्त किया था, लेकिन इस बार गठबंधन में यह सीट बीजेपी से जदयू के खाते में आ गई है। अब यहां जदयू ने कांग्रेस से आए सुभानंद मुकेश को अपना प्रत्याशी बनाया है, 2020 के चुनाव के कुछ दिन बाद ही सुभानंद मुकेश कांग्रेस छोड़कर जदयू में शामिल हुए थे। सुभानंद मुकेश कांग्रेस के दिवंगत नेता सदानंद सिंह के पुत्र है। सुभानंद मुकेश को उम्मीदवार बनाते ही बगावत शुरू हो गया और भाजपा विधायक पवन यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए नामांकन तिथि के अंतिम दिन नामांकन दाखिल कर दिया। अब यहां मुकाबला चतुर्थकोनिये हो गया। राजद से रजनीश यादव कांग्रेस से प्रवीण कुशवाहा निर्दलीय पवन कुमार यादव और एनडीए से सुभानंद मुकेश मैदान में है।
राजद में पीरपैंती में पुराने चेहरे पर भरोसा जताते हुए पूर्व विधायक रामविलास पासवान को टिकट थमाया है तो नाथनगर में नए चेहरे प्रशासनिक ऑफिसर जेड हसन को उम्मीदवार बनाया है, तो वही सुल्तानगंज में नए चेहरे चंदन सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एनडीए ने सुल्तानगंज में वर्तमान विधायक ललित नारायण मंडल पर भरोसा जताया है, नाथनगर में लोजपा ने जिला परिषद अध्यक्ष मिथुन यादव को टिकट थमाया है. जबकि पीरपैंती में नए चेहरे पर भाजपा में भरोसा जताते हुए मुरारी पासवान को टिकट थमाया है।



