मृत्यु का रहस्य: सचमुच आते हैं यमराज, साइंस बताता है दूसरी कहानी?

हिंदू मान्यताओं में यमराज की दूत आत्मा को ले जाते हैं, जबकि साइंस कहता है कि मृत्यु पर दिल और दिमाग रुकने के बाद भी कुछ देर तक न्यूरोलॉजिकल गतिविधियां चलती हैं। ये दोनों दृष्टिकोण मृत्यु के रहस्य को अलग-अलग नजरिए से खोलते हैं।

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नई दिल्ली: जब कोई इस दुनिया को अलविदा कहता है, तो दुख के साथ-साथ सवाल भी जागते हैं कि मरने के बाद क्या होता है? क्या यमराज सचमुच आत्मा को लेने आते हैं या यह सब दिमाग का खेल है? हर धर्म और संस्कृति में मृत्यु को लेकर अलग-अलग विश्वास हैं। कोई स्वर्ग-नरक की बात करता है, कोई पुनर्जनम में यकीन रखता है, तो कोई मानता है कि सब यहीं खत्म हो जाता है। लेकिन साइंस इस रहस्य को तर्क की कसौटी पर कसता है। आइए, हिंदू मान्यताओं और वैज्ञानिक खोजों के जरिए इस सवाल का जवाब तलाशें।

यमराज और आत्मा की यात्रा

हिंदू धर्म में मृत्यु को आत्मा का शरीर से अलगाव माना जाता है। गरुड़ पुराण के मुताबिक, जब इंसान की आखिरी सांसें चल रही होती हैं, यमदूत आत्मा को लेने पहुंचते हैं। मृत्यु के बाद 24 घंटे तक आत्मा अपने घर और प्रियजनों के आसपास भटकती है। इस दौरान पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्मकांड आत्मा की शांति के लिए किए जाते हैं। फिर, 13 दिन की यमलोक यात्रा शुरू होती है, जहां कर्मों के आधार पर आत्मा का अगला ठिकाना तय होता है, चाहे वह नया जन्म या स्वर्ग-नरक हो। यह विश्वास सदियों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, जो मृत्यु को एक आध्यात्मिक सफर के रूप में देखता है।

साइंस की नजर में मृत्यु

वैज्ञानिक दृष्टिकोण मृत्यु को जैविक प्रक्रिया मानता है। जब दिल धड़कना बंद करता है और सांसें रुकती हैं, तो कुछ ही मिनटों में दिमाग ऑक्सीजन की कमी से काम करना बंद कर देता है। इसे क्लिनिकल डेथ कहते हैं। लेकिन हाल की रिसर्च ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। 2013 और 2018 की स्टडीज में पाया गया कि दिल रुकने के बाद भी दिमाग कुछ सेकंड से मिनटों तक सक्रिय रह सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट्स ने देखा कि दिमाग का विजुअल कॉर्टेक्स हाइपरएक्टिव हो जाता है, जिससे ‘व्हाइट लाइट’ या ‘जिंदगी की झलक’ जैसे अनुभव हो सकते हैं। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में, नीयर-डेथ एक्सपीरियंस (NDE) वाले मरीजों ने बताया कि उन्हें तेज रोशनी या शरीर से बाहर निकलने का अहसास हुआ। वैज्ञानिक इसे न्यूरॉन्स की आखिरी उछाल मानते हैं, न कि आत्मा का संकेत।

मिथक और तर्क का संगम

हिंदू विश्वास जहां आत्मा की अमरता और यमराज की कहानी पर टिका है, वहीं साइंस मृत्यु को दिमाग की गतिविधियों से जोड़ता है। दोनों ही दृष्टिकोण मृत्यु को समझने की कोशिश हैं, जिसमें एक आध्यात्मिक, तो दूसरा तार्किक है। क्या यह न्यूरॉन्स का आखिरी नृत्य है या आत्मा की अनंत यात्रा? जवाब शायद कभी न मिले, लेकिन यह सवाल हमें जिंदगी की कीमत समझाता है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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