पिछले चुनाव से 30% कम हुए प्रत्याशी, 9 विस में लगेंगे दो ईवीएम

बिहार में इस बार 30 प्रतिशत उम्मीदवारों की संख्या कम हो गयी है। यह अक्टूबर 2005 के बाद सर्वाधिक कम है। इसबार कुल 2616 उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने छह जिलों में उम्मीदवार नहीं उतारे। आइए जानते हैं प्रदेश के चुनाव का पूरा विश्लेषण वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र नाथ राय के शब्दों में।

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पटना: विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट हो गयी है। इस चुनाव में 2616 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। यह संख्या पिछले विधानसभा चुनाव में उतरे 3733 की अपेक्षा 1117 कम है यानि 30 प्रतिशत संख्या कम है। इस बार नौ विधानसभा क्षेत्र ऐसे होंगे, जहां दो ईवीएम की आवश्यकता होगी। वहीं भाजपा ने अपने 101 प्रत्याशियों को उतारा है, लेकिन प्रदेश के छह जिलों में उसके एक भी उम्मीदवार नहीं हैं। राजद के 143 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनका 51 सीटों पर सीधे भाजपा के उम्मीदवारों के साथ मुकाबला है।

राजद के 91 सीटों पर भाजपा नहीं, एनडीए के अन्य घटक करेंगे मुकाबला

वहीं भाजपा के शेष 50 उम्मीदवारों की लड़ाई महागठबंधन के अन्य घटक दलों के साथ होगी। वहीं राजद के 91 सीटों पर एनडीए के अन्य घटक दल जदयू, लोजपा आर, हम और वीआईपी के उम्मीदवार मुकाबला करेंगे। बिहार की छह जिले मधेपुरा, खगड़िया, शेखपुरा, शिवहर, जहानाबाद और रोहतास में भाजपा ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। पिछली बार भी इनमें से पांच जिलों में भाजपा का कोई उम्मीदवार नहीं था। वहीं सहरसा, लखीसराय, नालंदा, बक्सर और जमुई जैसे अहम जिलों में भी बीजेपी सिर्फ एक-एक सीट पर ही सीमित दिखती है।

छह जिलों में भाजपा ने नहीं उतारे उम्मीदवार

एनडीए में सीट बंटवारे के तहत कई सीटें सहयोगी दलों के खाते में चली गईं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह सिर्फ गठबंधन नहीं रणनीति का अदृश्य वार है। बीजेपी जानती है कि हर जगह लड़ना ही जीतना नहीं होता। कुछ जगह पीछे हटना भी भविष्य की जीत की शतरंज का हिस्सा होता है। जिन छह जिलों में बीजेपी ने उम्मीदवार नहीं उतारे, वो इलाके जातीय रूप से संवेदनशील हैं। यहां कुर्मी, कोइरी, निषाद, पासवान और यादव जैसी जातियों का प्रभाव भारी है। बीजेपी चाहती है कि अपने सहयोगियों को आगे करके इन जातीय वोट-बैंकों को एकजुट किया जाए।

2010 में उम्मीदवारों की संख्या थी 3523

यदि इस बार लड़ रहे उम्मीदवारों पर नजर डालें तो अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में इससे पहले सबसे कम उम्मीदवार रहे। उस समय पूरे बिहार में 2135 उम्मीवारों की संख्या थी, जबकि इस बार 2616 उम्मीदवार मैदान में हैं। 2005 से अब तक उम्मीदवारों की संख्या पर गौर करें तो फरवरी 2005 (इस वर्ष एक साल में ही दो बार चुनाव हुए थे।) फरवरी 2005 में हुए चुनाव में 3193 उम्मीदवार, अक्टूबर 2005 में 2135 उम्मीदवार, 2010 में 3523 उम्मीदवार, 2015 में 3693 उम्मीदवार, 2020 में 3733 उम्मीदवार और अभी 2025 में कुल 2616 उम्मीदवार मैदान में हैं। यह संख्या झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद 2005 के बाद सर्वाधिक कम है।

झारखंड के अस्तित्व में आने से पूर्व होते थे ज्यादा उम्मीदवार

झारखंड राज्य बनने से पहले 1990 से 2000 के दौरान सर्वाधिक उम्मीदवार हुआ करते थे। उसके बाद 2010 से 2020 तक औसतन 35 सौ से अधिक प्रत्याशी चुनावी रण में होते थे। एक विधानसभा क्षेत्र में 16 से अधिक प्रत्याशी होने की स्थिति में एक से अधिक ईवीएम की आवश्यकता होती है।

चैनपुर, रोहतास और गया में सर्वाधिक 22 उम्मीदवार

एक ईवीएम में 16 प्रत्याशियों का नाम, उनके दल के नाम तथा चुनाव चिह्न अंकित होते हैं। इस चुनाव में 16 से अधिक प्रत्याशियों वाले विधानसभा क्षेत्र में कैमूर का चैनपुर (22), रोहतास का सासाराम (22), गयाजी का गया शहर (22 प्रत्याशी), मुजफ्फरपुर (20), मुजफ्फरपुर के कुढ़नी (20), वैशाली का महनार (18), कटिहार का बलरामपुर (18), औरंगाबाद का ओबरा (18) व दरभंगा जिले के बहादुरपुर (17 प्रत्याशी) शामिल है। यहां मतदान कराने के लिए सभी केंद्रों पर दो-दो ईवीएम की आवश्कता होगी।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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