नई दिल्ली: 36 घंटे का निर्जला छठ व्रत रखी महिलाएं आज डूबते और कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देंगी। ये उस ऊर्जा को नमन है, जिसके बिना जीवन का अस्तित्व ही नहीं। विज्ञान बताता है कि धूल और गैस से बना ये आग का गोला धरती को जिंदा रखे हुए है, लेकिन अब ये अपनी आधी उम्र जी चुका। ये बुझ गया, तो क्या होगा?
समा जाएगी इतनी पृथ्वी
वह सूर्य, जिसे हिंदू संस्कृति में देवता का स्थान दिया गया है और जिसे हर दिन जल चढ़ाकर नमन किया जाता है, असल में असीम ऊर्जा का महासागर है। उसकी विशालता इतनी है कि उसमें 13 लाख पृथ्वी समा सकती हैं। हम तक रौशनी पहुंचाने के लिए सूर्य को 6 लेयर पार करना पड़ता है। जिस उगते सूर्य की सुनहरी किरणों को देखकर छठ व्रती अर्घ्य देती हैं, वह प्रकाश लाखों वर्ष पहले सूर्य के कोर में जन्म ले चुका होता है।
सूरज नहीं रहा तो क्या होगा?
अगर सूरज बुझ गया तो पृथ्वी पर आने वाली रौशनी खत्म हो जाएगी। चन्द्रमा काला पड़ जाएगा क्योंकि चन्द्रमा के पास खुद की रौशनी नहीं है। फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया बंद हो जाएगी। इससे पेड़ पौधे मर जाएंगे। खेती नहीं होगी तो हमें खाने के लिए अन्न नहीं मिलेगा। धीरे-धीरे पृथ्वी का तापमान गिरने लगेगा और मानव जीवन सिर्फ एक इतिहास बनकर रह जाएगा।
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कौन है सूर्य?
ये तो हुई विज्ञान की बात अब हम आते हैं अध्यात्म की तरफ। 18 पुराणों में से एक मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक पहले पूरे संसार में अँधेरा था। एक अंडाकार आकार से ब्रह्मा प्रकट हुए। प्राकट्य के बाद उनके मुख से ॐ की ध्वनि निकलती है, जिसने सूर्य का रूप ग्रहण किया। इसके बाद ब्रह्मा जी के चारों मुखों से चारों वेद प्रकट होता है। ऋग्वेद में सूर्य को ऋषि कश्यप और अदिति का पुत्र बताया गया है।



