नई दिल्ली | ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में मनाया जाने वाला स्नान पूर्णिमा महोत्सव सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। यह पर्व केवल विशेष पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत का भी संकेत देता है। वर्ष 2026 में स्नान पूर्णिमा 29 जून को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से भव्य अभिषेक किया जाएगा। इस दिव्य आयोजन को देखने के लिए हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।
क्या है स्नान पूर्णिमा?
स्नान पूर्णिमा, जिसे स्नान यात्रा भी कहा जाता है, ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर मनाई जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर विशेष वेदी पर स्थापित किया जाता है। इसके बाद वैदिक मंत्रों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका पवित्र स्नान कराया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान के दर्शन और पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
108 कलशों से होता है अभिषेक
स्नान पूर्णिमा का मुख्य आकर्षण भगवान का महाअभिषेक है। इस अनुष्ठान में 108 कलशों के पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का स्नान कराया जाता है। यह दृश्य भक्तों के लिए बेहद खास और श्रद्धा से भरा होता है।
स्नान के बाद क्यों नहीं होते दर्शन?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाअभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं। इसलिए उन्हें लगभग 15 दिनों के लिए विश्राम दिया जाता है। इस अवधि को अनवसर काल कहा जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के नियमित दर्शन नहीं होते।
यहीं से शुरू होती है रथ यात्रा
अनवसर काल समाप्त होने के बाद भगवान नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे नवयौवन दर्शन कहा जाता है। इसके बाद विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू होती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगी।
धार्मिक महत्व
स्नान पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर पूजा-पाठ, दान-पुण्य और भक्ति के माध्यम से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यही कारण है कि यह पर्व भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है।



