चीन की ‘अदृश्य’ चालें होंगी फेल! भारत के पास आया ‘सुपर रडार’

'वायु शक्ति 2026' में भारतीय वायु सेना द्वारा प्रदर्शित संदिग्ध नेबो-यूएम (Nebo-UM) रडार, लंबी दूरी की निगरानी और स्टील्थ विमानों को पकड़ने की भारत की क्षमताओं में एक बड़ा तकनीकी अपग्रेड है। अपनी अनूठी VHF तकनीक और 3D ट्रैकिंग के दम पर, यह रडार चीन के J-20 जैसे अदृश्य लड़ाकू विमानों को भी बहुत दूर से बेनकाब करने की क्षमता रखता है, जिससे भारतीय सीमा की सुरक्षा और अधिक अभेद्य हो गई है।

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नई दिल्ली – हाल ही में भारतीय वायु सेना (IAF) के ‘वायु शक्ति 2026’ अभ्यास के दौरान जारी किए गए वीडियो ने रक्षा जगत में एक नई हलचल पैदा कर दी है। वीडियो में एक शक्तिशाली लंबी दूरी का एयर सर्विलांस रडार दिखाई दिया है, जिसने विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रडार के अनूठे एंटीना डिजाइन और उसकी बनावट को देखकर रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह रूस द्वारा निर्मित ‘नेबो-यूएम’ (Nebo-UM) वेरी हाई फ्रीक्वेंसी (VHF) रडार हो सकता है।

भले ही वायु सेना ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसकी मौजूदगी का संकेत ही यह बताने के लिए काफी है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और ‘स्टील्थ’ (अदृश्य) खतरों को पहचानने में कितना गंभीर है। आज के इस ब्लॉग में हम सरल भाषा में समझेंगे कि आखिर यह रडार क्या है और क्या यह चीन के आधुनिक J-20 जैसे विमानों के लिए चुनौती बन सकता है।

इतिहास और विकास: रडार तकनीक का सफर

रडार (RADAR) का पूरा नाम ‘रेडियो डिटेक्शन एंड रेंजिंग’ है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसका उपयोग दुश्मन के विमानों को खोजने के लिए शुरू हुआ था। उस समय रडार बहुत विशाल होते थे और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना लगभग असंभव था।

जैसे-जैसे समय बीता, युद्ध की तकनीक बदली। रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) ने ऐसी रडार प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित किया जो ‘VHF’ (वेरी हाई फ्रीक्वेंसी) बैंड का उपयोग करती थीं। यह एक पुरानी लेकिन अत्यंत प्रभावी तकनीक साबित हुई। ‘नेबो’ परिवार के रडार इसी विरासत का आधुनिक रूप हैं। 1980 और 90 के दशक में विकसित किए गए शुरुआती ‘नेबो’ रडार का मुख्य उद्देश्य दुश्मन के विमानों को उनकी लंबी रेंज से पहचानना था। समय के साथ, इसे अपग्रेड करते हुए ‘नेबो-यू’ और फिर ‘नेबो-यूएम’ बनाया गया, जिसे आज के दौर में स्टील्थ विमानों (जो सामान्य रडार से नहीं दिखते) को पकड़ने के लिए सबसे सटीक माना जाता है।

नेबो-यूएम रडार: क्या है इसकी ताकत?

यह रडार आधुनिक तकनीकी इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है। इसकी विशेषताएं इसे दुनिया के अन्य रडार से अलग बनाती हैं:

  • अद्भुत गतिशीलता: यह रडार पहियों वाले हाई-मोबिलिटी चेसिस पर टिका है। इसका मतलब है कि इसे किसी भी दुर्गम इलाके या सीमा के पास बहुत कम समय में तैनात किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।
  • VHF बैंड का उपयोग: अधिकांश आधुनिक रडार उच्च फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं, जो स्टील्थ विमानों की कोटिंग से टकराकर वापस नहीं आते, जिससे वे ‘गायब’ हो जाते हैं। नेबो-यूएम ‘VHF वेवलेंथ’ का उपयोग करता है। यह वेवलेंथ स्टील्थ विमानों के आकार के साथ मेल खाती है, जिससे विमान का पता लगाना आसान हो जाता है।
  • 600 किलोमीटर की नजर: इसकी सर्विलांस रेंज 600 किलोमीटर तक है। यह पारंपरिक लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को बहुत दूर से ट्रैक कर सकता है।
  • स्टील्थ ट्रैकिंग: स्टील्थ विमानों के मामले में भी यह 250 किलोमीटर से अधिक की दूरी से खतरे को भांपने में सक्षम है।
  • 3D मैपिंग: यह न केवल टारगेट का स्थान बताता है, बल्कि उसकी ऊंचाई और दिशा का पूरा 3D ब्यौरा देता है।

क्या नेबो-यूएम रडार चीन के J-20 का पता लगा सकता है?

चीन ने हाल के वर्षों में अपने J-20 स्टील्थ फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ाई है और वे J-35 पर भी तेजी से काम कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में ऐसी चिंताएं हैं कि पाकिस्तान भी भविष्य में इस तरह की तकनीक हासिल कर सकता है।

नेबो-यूएम एक ‘अर्ली वॉर्निंग’ रडार है। इसका मुख्य कार्य दुश्मन के विमान को दूर से ही पहचानना है। भले ही यह सीधे मिसाइल को गाइड न करे, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है। एक बार जब यह रडार स्टील्थ विमान (जैसे J-20) को पकड़ लेता है, तो यह उस डेटा को अन्य सिस्टम (जैसे S-400 या अन्य फाइटर जेट्स) को दे देता है। इसके बाद, दुश्मन का स्टील्थ विमान अपनी ‘अदृश्यता’ खो देता है और उसे मार गिराना संभव हो जाता है।

तुलनात्मक विश्लेषण और वर्तमान रुझान

आज की सैन्य दुनिया में ‘देखने’ और ‘छिपे रहने’ की जंग सबसे बड़ी है।

  • पुराना बनाम नया: पुराने रडार स्टील्थ तकनीक के आगे बेअसर हो रहे थे, इसलिए नेबो-यूएम जैसे रडार को विशेष रूप से डिजाइन किया गया ताकि वे कम फ्रीक्वेंसी वाली तरंगों से दुश्मन को बेनकाब कर सकें।
  • नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर: वर्तमान रुझान यह है कि कोई भी रडार अकेले काम नहीं करता। नेबो-यूएम का असली फायदा तब है जब यह भारत के अन्य एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे आकाश, एमआरएसएएम, या एस-400) के साथ जुड़ा हो।
  • सीमाओं पर सुरक्षा: भारत के उत्तरी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर तनाव को देखते हुए, ऐसे रडार की आवश्यकता है जो न केवल हवाई क्षेत्र की निगरानी करें, बल्कि दुश्मन के किसी भी छिपकर किए जाने वाले हमले को नाकाम कर सकें।

निष्कर्ष

नेबो-यूएम जैसे रडार भारत की वायु रक्षा क्षमता में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकते हैं। यह रडार हमें वह बढ़त देता है जो आधुनिक युद्ध में जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। तकनीक के मामले में, यह रडार साबित करता है कि कोई भी विमान कितना भी एडवांस क्यों न हो, उसे दुनिया की किसी न किसी ‘आंख’ से बचना नामुमकिन है। भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए नेबो-यूएम एक ऐसा रक्षक है, जो आसमान में किसी भी अनचाही आहट को समय रहते पकड़ने के लिए तैयार है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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