भागलपुर: सावन महीने में शिवभक्तों की आस्था का सैलाब सुल्तानगंज में खूब दिख रहा है। देश के कोने-कोने से कांवड़िए बाबा धाम पहुंच रहे हैं। सुल्तानगंज के गंगा घाट पर श्रद्धा का ऐसा ही अद्भुत दृश्य बृहस्पतिवार तब दिखा, जब पश्चिम बंगाल से आए शिवभक्तों की टोली 35 किलो वजनी बजरंगबली की आकृति में विशाल कांवड़ लेकर घाट पर पहुंची। इसका देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
यह कांवड़ न केवल अपने वजन में, अपनी भव्यता और विशिष्टता में भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी। करीब 20 लोगों की एक टीम ने 15 दिनों की कड़ी मेहनत से इस विशेष कांवड़ को करीब 50,000 रुपये में तैयार किया है। इसमें भगवान हनुमान की प्रतिमा, रंग-बिरंगे सजावटी कपड़े, साउंड सिस्टम और आकर्षक विद्युत सज्जा ने घाट की रौनक बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसी कांवड़ न केवल भक्ति का प्रतीक हैं, बल्कि यह दिखाता है कि सच्ची आस्था के आगे कोई भी वजन भारी नहीं होता। इस कावड़ में खासतौर पर रात के अंधेरे में रंगीन धुंआ आकर्षित लग रहे हैं। लोगों में इसके साथ सेल्फी लेने की होड़ मची है।
कांवड़िया अमित ने बताया कि देवों के देव महादेव से क्या मांगना। इनसे यह जो मांगे वह भी पूरा होता है और जो नहीं मांगते वह भी पूरा करते हैं। महादेव से मांगने की जरूरत नहीं। ये सबको बराबर देते हैं। महादेव में मेरी पूरी आस्था है भगवान सबको खुश रखे बस यही हमारी कामना है।
वहीं, जितेंद्र प्रजापति ने बताया कि हम लोग पूरी श्रद्धा भाव से हर वर्ष नए थीम पर कावड़ बनकर यात्रा शुरू करते हैं। इस बार हनुमान जी को लेकर जा रहे हैं। यहां से बैद्यनाथ धाम जाने में तीन से चार दिन लगता है, इस दौरान रास्ते में हमारे आकर्षक कावड़ के साथ कांवडिय़ा भी सेल्फी लेते हैं।
लकड़ी और थर्मोकोल से बनी है आकृति
कोलकाता से ट्रेन के माध्यम से हनुमान जी बने कावड़ को सुल्तानगंज लेकर पहुंचे। मूर्ति लकड़ी और थर्मोकोल से बनी है। इनका वजन करीब 35 किलो है। कावड़ को ट्रेन में अलग-अलग भाग में बांट कर लाया गया। सुल्तानगंज पहुंचकर जोडक़र हनुमान की आकृति तैयार हुई। इस कावड़ को बढ़ई और थर्मोकोल आर्टिस्ट द्वारा बनाया गया है।



