पटना: बिहार में मानसून सक्रिय है। गंगा, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और कोसी नदियों का जलस्तर कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गया है। पटना, मुंगेर, भागलपुर, खगगड़िया समेत दूसरे कई जिलों में बाढ़ का संकट है। पटना में दीघाघाट और गांधीघाट पर गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं, बक्सर में जलस्तर 53 सेंटीमीटर नीचे है। फतुहा, मनेर, बख्तियारपुर और दानापुर जैसे इलाकों में बाढ़ का प्रभाव दिखने लगा है। निचले क्षेत्रों में पानी भर गया है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
उधर, बढ़ते जलस्तर का असर खेती-किसानी पर भी दिखने लगा है। कई खेतों में पानी भर गया है। इससे बड़े पैमाने पर फसलें नष्ट हो रही हैं। सरकार ने किसानों के लिए मुआवजे की योजना तैयार करने की बात कही है।
बांका डैम ओवरफ्लो, छह की मौत
बांका जिले का चांदन डैम पूरी तरह भर गया है। अब इसका पानी ओवरफ्लो होकर नदी में गिर रहा है। बीते एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश से छह लोगों की नदियों में डूबने से मौत हो गई है। राज्य सरकार ने नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद हैं। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को अलर्ट मोड़ में हैं। तटबंधों की सुरक्षा के लिए अभियंताओं और अधिकारियों की 24 घंटे तैनाती की गई है। विभाग ने दावा किया है कि फिलहाल सभी तटबंध सुरक्षित हैं।
फरक्का डैम के सभी गेट खोल गए
बक्सर से कहलगांव तक गंगा में उफान के बाद एहतियातन फरक्का डैम के सभी 108 गेट खोल दिये गये हैं। पटना और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा सोमवार रात फरक्का में भी लाल निशान को पार कर गई। मंगलवार की शाम पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेमी और फरक्का में 20 सेमी ऊपर था। इससे तटबंधों पर दबाव बना है।
जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की निगरानी के लिए 600 तटबंध सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं। पड़ोसी राज्यों में भारी बारिश के बाद गंगा का जलस्तर बक्सर से फरक्का तक बढ़ रहा है। बक्सर में तो नदी बीते साल की तुलना में छह मीटर ऊपर है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में इस अवधि में गंगा नदी में पिछले 15 सालों में इतना पानी नहीं आया था। जुलाई के पहले सप्ताह में गंगा में पिछले साल के मुकाबले पांच मीटर अधिक पानी था। सिर्फ पटना में ही गंगा बीते साल से दो मीटर ऊपर बह रही थी।
जिले के 163 स्कूलों के 15 हजार बच्चों की पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
बिहार के कई जिलों में गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा से शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण इलाकों में पानी आ जाने से विद्यालय जाने का संपर्क क्षतिग्रस्त हो रहा है। आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है।
भागलपुर के सबौर प्रखंड के संत नगर स्कूल में तबादला होकर पहुंचे प्रधानाध्यापक विनोद कुमार राय का 11 सालों में पहली बार बाढ़ से पाला पड़ा है। पहले दिन ही उन्हें विद्यालय तक का सफर नाव से तय करना पड़ रहा है। इस हालात को देखकर गुरुजी पूरी तरह भयभीत हो गए।
शिक्षक रमेश कुमार ने बताया कि स्कूल तो पास में ही है, लेकिन वहां जाने के लिए करीबन एक किलोमीटर दूर घूम कर गंगा जी के रास्ते नाव के सहारे जाना पड़ रहा है। इस बाढ़ की विभीषिका से जिले के 163 स्कूलों के 15000 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। राहत शिविर में इन बच्चों को चार घंटे की विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी। इसको लेकर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा तैयारी शुरू कर दी गई है।
बाढ़ प्रबंधन को लेकर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने सोमवार प्रदेश भर के 28 जिलों के जिला शिक्षा और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों का ऑनलाइन ओरियंटेशन आयोजित किया जाएगा। इसमें निर्देश दिया गया कि बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की पहचान सुनिश्चित की जाए। इस बाबत डीपीओ एसएसए शिवकुमार वर्मा ने बताया कि बाढ़ के समय में बच्चों की तीन-चार घंटे की विशेष कक्षा होगी। इसमें पठन-पाठन, खेलकूद और अन्य ज्ञानवर्धक गतिविधियां शामिल होंगी।
राज्य के 28 जिले होते हैं बाढ़ से प्रभावित
बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निर्देशक मयंक वारवड़े द्वारा जारी प्रपत्र में यह कहा गया है कि राज्य के 28 जिले बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इनमें 15 जिलों पर बाढ़ का खतरा सर्वाधिक रहता है। इसलिए इन सभी जिलों से बाढ़ प्रभावित स्कूलों की सूची मांगी गई है।
जिला शिक्षा विभाग के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, गोपालपुर प्रखंड के 32, नाथनगर के 25, नारायणपुर के 12, रंगरा चौक के 17, इस्माइलपुर के 10, सबौर के 16, कहलगांव के 7, सुल्तानगंज के 31 और पीरपैंती के 13 स्कूल बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इसके बाद इन स्कूलों की पढ़ाई राहत शिविर में करवाई गई थी।
सतर्कता की अपील, हेल्पलाइन नंबर जारी
सरकार ने आम जनता से नदी किनारे जाने से बचने, बच्चों को पानी से दूर रखने और किसी भी आपात स्थिति में एसडीआरएफ या एनडीआरएफ से संपर्क करने की अपील की है। आपदा प्रबंधन विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं ताकि किसी भी तरह की सहायता तुरंत दी जा सके।



