पटना: बिहार पुलिस ने जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशाेर समेत उनकी पार्टी के 2000 लोगों पर मामला जर्द किया है। इस पर आरोप है कि विधानसभा सत्र के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। मना करने पर सुरक्षा बलों के साथ झड़प की। यही नहीं, निषेधाज्ञा को भंग किया है।
असल में बुधवार पटना में जन सुराज ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन प्रतिबंधित क्षेत्र में किया गया था। पटना सिटी एसपी ने इसकी पुष्टि की है। इस प्रदर्शन के दौरान जन सुराज के कार्यकर्ता और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी।
प्रशांत किशोर समेत नौ नामजद
विधानसभा के पास दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त सदर अंचल के मुख्य सहकारिता प्रसार अधिकारी संजय कुमार मिश्रा के आवेदन पर केस दर्ज किया गया है। आवेदन में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर, प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, प्रवक्ता विवेक कुमार, एनपी मंडल, किशोर कुमार, अरविन्द सिंह, ललन यादव, जितेन्द्र यादव, मनीष कश्यप को नामजद किया गया। साथ ही दो हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ भी प्राथमिमी दर्ज की गई है।
कई धाराओं में दर्ज एफआईआर
पुलिस के साथ हाथापाई और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के मामलों में धारा 191(2), 190, 132, 223 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामलों को लेकर की है।
तीन मांगों को लेकर किया था प्रदर्शन
जन सुराज के कार्यकर्ताओं तीन मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। पहली मांग थी कि साल 2023 की जातीय जनगणना में चिन्हित 94 लाख गरीब परिवारों को 2 लाख रुपये की सहायता कब मिलेगी। दूसरा 50 लाख दलित और अति पिछड़ा परिवार को 3 डिसमिल जमीन कब दी जाएगी। तीसरा जमीन सर्वे के नाम पर वंशावली, रसीद और दाखिल-खारिज में हो रही लूट कब तक चलती रहेगी।



