नई दिल्ली: उत्तराखंड के उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले में धराली गांव के पास खीर गंगा नदी के ऊपर मंगलवार सुबह बादल फटने की घटना ने भयंकर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा ने इलाके में भारी नुकसान पहुंचाया, जिसमें 20 से 25 होटल और होम स्टे बह गए। कई घर मलबे में दब गए। 100 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस आपदा में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि भूस्खलन के कारण कुछ सैनिकों के लापता होने की भी खबरें हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
भयावह मंजर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
प्रत्यक्षदर्शियों ने सोशल मीडिया पर इस आपदा के भयावह दृश्य साझा किए हैं, जिनमें पहाड़ी से तेजी से बहता पानी घरों और दुकानों को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है। वीडियो में लोगों की चीखें और दहशत साफ सुनाई दे रही है। धराली और हर्षिल के आसपास का इलाका पूरी तरह पानी और मलबे से घिर गया है। स्थानीय बाजार में भारी नुकसान हुआ है, और कई सड़कें मलबे के कारण बंद हो चुकी हैं।
युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ के डीआईजी मोहसेन शहीदी ने बताया कि अब तक 150 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, लेकिन 100 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। उन्होंने कहा, हम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति का आकलन कर रहे हैं और हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं।
भारी बारिश और भूस्खलन ने बचाव कार्यों में बाधा डाली
हालांकि, लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने बचाव कार्यों में बाधा डाली है। गंगोत्री नेशनल हाईवे कई जगहों पर बंद हो गया है, और कुछ स्थानों पर सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं। भटवाड़ी के पास चढेती में 200 मीटर सड़क सैलाब की भेंट चढ़ गई है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) सड़कों को खोलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बारिश और मलबा लगातार चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने लिया जायजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर धराली आपदा और बचाव कार्यों की जानकारी ली। सीएम धामी ने बताया कि राज्य सरकार पूरी तत्परता से काम कर रही है, और केंद्र सरकार ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
बादल फटने का क्या है विज्ञान?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बादल फटना एक ऐसी स्थिति है जिसमें छोटे क्षेत्र में बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होती है। जब वायुमंडल में गर्म और ठंडी हवाएं मिलती हैं, तो पानी की बूंदें तेजी से जमकर भारी वर्षा का कारण बनती हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, यदि एक घंटे में 20-30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो, तो इसे बादल फटना कहा जाता है। यह प्राकृतिक घटना पहाड़ी क्षेत्रों में खतरनाक साबित होती है, क्योंकि तेज बहाव और मलबा बस्तियों को तबाह कर सकता है।
चुनौतियां और भविष्य के लिए सबक
उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, और इनसे निपटने के लिए बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और बुनियादी ढांचे की जरूरत है। फिलहाल, धराली में बचाव कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहे हैं। स्थानीय लोग और प्रशासन एकजुट होकर इस आपदा से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उन्हें तत्काल सहायता मिल सके।



