नई दिल्ली: रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को ट्रेनों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन और निपटान के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी की हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को साफ-सुथरा और आरामदायक सफर मुहैया कराना है। ये निर्देश 13 नवंबर 2025 को जारी किया गया। बोर्ड ने कहा कि ट्रेनों के अंदर और बाहर स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है, ताकि रेलवे की छवि बेहतर हो और स्वच्छ भारत मिशन को बल मिले।
कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था
निर्देशों में ओबीएचएस (ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस) और पैंट्री कार स्टाफ को साफ तौर पर जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें यात्रियों के डिब्बों से कचरा इकट्ठा करना होगा और इसे सीलबंद थैलियों में पैक करके रास्ते में नामित स्टेशनों पर फेंकना होगा। इससे ट्रेन के अंदर गंदगी नहीं फैलेगी और स्टेशन पर भी कचरा नहीं बिखरेगा। स्टाफ को ट्रेन के शौचालय और कोच साफ रखने के लिए भी कहा गया है। जोनल रेलवे को स्टाफ को ट्रेनिंग और जरूरी सामान उपलब्ध कराना होगा, क्योंकि ज्यादातर स्टाफ कॉन्ट्रैक्ट पर हैं।
स्टाफ के साथ संवाद
स्वच्छता को मजबूत बनाने के लिए बोर्ड ने ‘संवाद’ नाम का विशेष अभियान शुरू किया है। वाणिज्य और मैकेनिकल विभाग के सीनियर सुपरवाइजर और अधिकारी सभी ट्रेनों के ओबीएचएस व पैंट्री स्टाफ से सीधे बातचीत करेंगे। इन सत्रों में स्वच्छता की अहमियत बताई जाएगी, वीडियो दिखाए जाएंगे और स्टाफ की समस्याओं को सुना जाएगा। स्टाफ को सक्रिय और जिम्मेदार बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह अभियान एक महीने में पूरा होगा, जिसमें सभी ट्रेनों को कवर किया जाएगा। डिवीजन स्तर पर फीडबैक इकट्ठा होगा, जो जोनल स्तर पर पीसीसीएम और पीसीएमई को भेजा जाएगा। अंत में, 10 दिनों में रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
सख्त नियम और उल्लंघन की सजा
ओबीएचएस और पैंट्री कार के लाइसेंसी को इन नियमों की काउंसलिंग दी जाएगी। कोई उल्लंघन हुआ तो इसे कॉन्ट्रैक्ट का बड़ा ब्रेक माना जाएगा और ठेका रद्द कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था जुलाई 2024 के पुराने निर्देशों पर आधारित है, जिसमें कचरा कितना निकलता है इसका अध्ययन, थैलियों की न्यूनतम संख्या और सीआरआईएस के सेंट्रलाइज्ड मैनेजमेंट सिस्टम में डेटा एंट्री शामिल थी। अब मॉनिटरिंग और सख्त होगी।यात्रियों को फायदाये कदम ट्रेनों में स्वच्छता बढ़ाएंगे, शौचालय साफ रहेंगे और सफर सुहाना बनेगा। स्टाफ की ट्रेनिंग और संवाद से वे अपनी जिम्मेदारी बेहतर समझेंगे। रेलवे बोर्ड का मानना है कि सख्ती के साथ मानवीय दृष्टिकोण से स्वच्छ भारत का सपना साकार होगा। इससे रेलवे की सेवाएं और बेहतर होंगी, यात्रियों की शिकायतें कम होंगी। कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय रेल को विश्व स्तर की स्वच्छता प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है।



