नई दिल्ली: श्रम शक्ति नीति-2025 (राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति) का मसौदा भारत की श्रम व्यवस्था को समावेशी, डिजिटल और भविष्योन्मुखी बनाने का प्रयास है, जो संवैधानिक मूल्यों, आईएलओ मानकों और सतत विकास लक्ष्यों से प्रेरित है। श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘श्रम शक्ति नीति-2025’ के मसौदे पर त्रिपक्षीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में नियोक्ता संघों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मकसद नीति को बेहतर बनाना था, ताकि यह कर्मचारियों की सुरक्षा और देश की आर्थिक प्रगति दोनों को मजबूत करे।
नीति का उद्देश्य और दृष्टिकोण
श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने बताया कि श्रम शक्ति नीति-2025 भारत के लिए एक नई सोच है। यह हर कर्मचारी की गरिमा बनाए रखते हुए उत्पादकता, नवाचार और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देगी। नीति संविधान, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर आधारित है। यह भविष्य के लिए तैयार एक न्यायपूर्ण श्रम व्यवस्था बनाने की दिशा में कदम है।
मंत्री का संदेश सुझावों का स्वागत
डॉ. मांडविया ने कहा कि सभी का साझा लक्ष्य कर्मचारियों की भलाई सुनिश्चित करना है। उन्होंने नियोक्ताओं और यूनियनों से मसौदे पर सुझाव मांगे। मंत्री ने जोर दिया कि उनके अनुभव से मिलने वाले विचार नीति को और मजबूत बनाएंगे। नीति में बदलाव संभव हैं और कई दौर की चर्चा के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। यह प्रक्रिया खुली और सहयोगपूर्ण रहेगी।
यूनियनों की राय और मांगें
सभी ट्रेड यूनियनों ने मंत्रालय की पहल की सराहना की। इनमें भारतीय मजदूर संघ (BMS), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), हिंद मजदूर सभा (HMS), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) जैसी बड़ी यूनियनें थीं। उन्होंने पहले दिए सुझाव दोहराए और नए विचार दिए। मुख्य मांगें कर्मचारी सुरक्षा मजबूत करना, सामाजिक सुरक्षा की बेहतर डिलीवरी, शिकायत निवारण व्यवस्था सुधारना और रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करना थी। यूनियनों का कहना था कि नीति कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दे।
नियोक्ताओं का पक्ष
नियोक्ता संगठनों ने भी नीति की दृष्टि और मिशन की तारीफ की। इनमें ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज (AIAI), फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI), कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और असोचैम जैसे बड़े नाम शामिल थे। उन्होंने नवाचार को बढ़ावा, नौकरियां पैदा करना, अनुपालन सरल बनाना और कारोबार की सुगमता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने उचित कामकाजी हालात सुनिश्चित करने की बात कही। उनका मानना है कि नीति विकास और कर्मचारी हितों में संतुलन बनाए।सकारात्मक समापनबैठक सकारात्मक माहौल में खत्म हुई। सभी पक्षों ने विश्वास जताया कि अंतिम नीति मजबूत, भविष्योन्मुखी और समावेशी होगी। यह भारत के श्रम प्रशासन को आने वाले वर्षों तक दिशा देगी। मंत्रालय कई और दौर की चर्चा कर सुझावों को शामिल करेगा।



