मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। इस स्तम्भ को और मजबूती और मान्यता प्रदान करने के लिए हर वर्ष 16 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है। यह दिन एक स्वतंत्र और ज़िम्मेदार प्रेस का प्रतीक है, जो लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर आज पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। ये पुरस्कार प्रिंट मीडिया में असाधारण योगदान देने वाले पत्रकारों को समर्पित हैं।इनमें सबसे प्रतिष्ठित राजा राम मोहन राय पुरस्कार श्रेष्ठ पत्रकारिता के लिए सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय प्रेस दिवस..?
यह दिवस प्रत्येक वर्ष 16 नवंबर को स्वतंत्र और दायित्वपूर्ण प्रेस की भूमिका को मान्यता प्रदान करने के लिए मनाया जाता है। यह दिन प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया की स्थापना के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है। काउंसिल ने 1966 में इसी दिन अपना कामकाज शुरू किया था।

प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के बारे में
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), एक कानूनी निकाय है, इसकी स्थापना मुख्य रूप से प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने और देश में समाचार पत्रों तथा समाचार एजेंसियों के मानकों में सुधार करने के लिए प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1978 के तहत की गई है।
भारत में प्रेस की स्थिति
भारत का मीडिया जगत का लगातार विस्रतार हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार रजिस्टर्ड पब्लिकेशन की संख्या 2004-05 में 60,143 से बढ़कर 2024-25 में 1.54 लाख हो गई है, जो प्रेस की बढ़ती पहुंच और शक्ति को दिखाता है।

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मीडिया प्रशासन में सुधार और नई पहलें
प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने, नैतिक रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने, रेगुलेशन प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने और मीडिया पेशेवरों को सशक्त करने के लिए कई पहलें चल रही हैं
- भारतीय प्रेस परिषद और प्रेस रजिस्ट्रार जनरल जैसे वैधानिक संस्थान
- पीआरपी अधिनियम, 2023
- डिजिटल प्रेस सेवा पोर्टल
- पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और कल्याणकारी योजनाएँ
- पीआरपी (प्रेस और आवधिक पंजीकरण) अधिनियम 2023 और प्रेस सेवा पोर्टल आवधिक पंजीकरण का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण करते हैं, जिससे प्रकाशकों के लिए व्यापार करना आसान हो जाता है।



