नई दिल्ली: यमुना (Yamuna) नदी, जो कभी दिल्ली की जीवनरेखा थी, आज अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की सोमवार को जारी ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर पुष्टि की है कि पल्ला से असगरपुर तक का यमुना खंड देश के सबसे प्रदूषित नदी हिस्सों में शुमार है। इसे प्राथमिकता-1 श्रेणी में रखा गया है, जो गंभीर प्रदूषण की चेतावनी देता है। जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) के आधार पर इसकी हालत इतनी खराब है कि यह जल जीवन के लिए लगभग मृतप्राय हो चुका है। दिल्लीवालों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं, क्योंकि नदी की गुणवत्ता में सुधार की कोई किरण नजर नहीं आ रही।
देश में प्रदूषण का हाल कुछ राहत, मगर दिल्ली की चिंता बरकरार
सीपीसीबी की ‘प्रदूषित नदी खंडों की जल गुणवत्ता बहाली’ रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 296 नदी खंड प्रदूषित हैं, जो 2022 के 311 और 2018 के 351 की तुलना में थोड़ा कम है। इनमें से 37 खंड प्राथमिकता-1 में हैं, जहां बीओडी 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कहीं ज्यादा है। यह आंकड़ा 2022 के 46 खंडों से कम है, जो बताता है कि कुछ जगहों पर सुधार हुआ। लेकिन दिल्ली की यमुना इस प्रगति से अछूती रही। 2022-23 में सात निगरानी केंद्रों पर जांच में हर जगह बीओडी मानक से ऊपर मिला, जिसमें अधिकतम 83 एमजी/एल दर्ज हुआ—यह सामान्य से 27 गुना ज्यादा है। यमुना का यह 22 किलोमीटर लंबा हिस्सा अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक कचरे और अन्य प्रदूषकों का शिकार बना हुआ है।
दिल्ली में यमुना की हालत क्यों बदतर?
रिपोर्ट बताती है कि वजीराबाद बैराज से लेकर नजफगढ़ ड्रेन तक प्रदूषण अपने चरम पर है। डिसॉल्व्ड ऑक्सीजन (डीओ) स्तर लगभग शून्य है, जिसका मतलब है कि नदी में जलीय जीवन के लिए कोई जगह नहीं बची। अमोनिया का स्तर भी 3 एमजी/एल से ज्यादा है, जो पानी को जहरीला बना रहा है। निजामुद्दीन और ओखला जैसे इलाकों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। सीपीसीबी के 2022-23 के आंकड़े, जो 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,116 स्थानों से जुटाए गए, बताते हैं कि दिल्ली में यमुना की सफाई के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
अन्य राज्यों का भी बुरा हाल
दिल्ली अकेली नहीं है। गुजरात की साबरमती और अमलखाड़ी, मध्य प्रदेश की चंबल (नागदा से गांधी सागर बांध तक), और तमिलनाडु की सरबंगा नदियां भी प्राथमिकता-1 सूची में हैं। ये नदियां औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज और कृषि रसायनों से जूझ रही हैं। लेकिन दिल्ली में यमुना की स्थिति इसलिए ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि यह राष्ट्रीय राजधानी की नदी है और करोड़ों लोगों की जीवनरेखा से जुड़ी है।
रास्ता क्या है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अनुपचारित सीवेज, जो 641 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) यमुना में डाला जा रहा है, इसकी सबसे बड़ी वजह है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने और ड्रेनेज को नियंत्रित करने की जरूरत है। साथ ही, हरियाणा से इकोलॉजिकल फ्लो (23 क्यूसेक) सुनिश्चित करना होगा, जो 1994 के जल समझौते की समीक्षा से संभव है। नमामि गंगे जैसी योजनाओं को और सख्ती से लागू करना होगा, साथ ही औद्योगिक इकाइयों पर कड़ी नजर रखनी होगी।



