नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा (H-1B Visa) शुल्क बढ़ाने के फैसले ने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी का मानना है कि इस निर्णय का असर भारत (US-India Relations) के आईटी सेवा निर्यात पर बहुत कम होगा, लेकिन अमेरिकी स्टार्टअप और नवाचार को यह कदम अधिक प्रभावित करेगा।
ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम
ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने हाल ही में एच-1बी वीजा (H-1B Visa) शुल्क को बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका उद्देश्य वीजा प्रणाली के दुरुपयोग को रोकना और उच्च-गुणवत्ता वाले पेशेवरों को आकर्षित करना है। अघी ने कहा कि इस बदलाव से भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका में पहले से बेहतर पैकेज मिलने की संभावना है, जबकि सामान्य कार्य भारत स्थानांतरित हो सकते हैं।
भारत पर कम असर, अमेरिका पर बड़ा दबाव
अघी का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था और उसके आईटी सेवा निर्यात (IT Services) पर इस फैसले का असर न्यूनतम होगा। इसके विपरीत, अमेरिका में स्टार्टअप और इनोवेशन पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ जैसी चुनौतियों के बावजूद, दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध आगे बढ़ते रहेंगे।
उद्योग जगत की चिंताएं
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) अमेरिका के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने कहा कि वीजा शुल्क वृद्धि के बाद भारतीय और अमेरिकी कंपनियां, दोनों ही, प्रतिभाशाली और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इमिग्रेशन नीति किसी भी देश का संप्रभु अधिकार है और हर सरकार अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नियम तय करती है।
जर्मनी का भारतीय पेशेवरों को आमंत्रण
एच-1बी विवाद के बीच जर्मनी ने उच्च कौशल वाले भारतीयों का खुले दिल से स्वागत करने की बात कही है। भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने कहा कि आईटी, प्रबंधन, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारतीयों के लिए जर्मनी में बेहतरीन अवसर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि जर्मनी में काम करने वाले भारतीय शीर्ष कमाई करने वालों में शामिल हैं और उनकी औसत आय स्थानीय नागरिकों से अधिक है।
जर्मनी में मेहनती भारतीयों का स्वागत
एकरमैन ने कहा कि जर्मनी की प्रवासन नीति स्थिर और विश्वसनीय है। उन्होंने भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और योगदान ने जर्मन समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया है। उन्होंने साफ कहा, “हम सर्वश्रेष्ठ लोगों को सर्वश्रेष्ठ नौकरियां देने में विश्वास करते हैं और उच्च कौशल वाले भारतीयों का हमारे यहां हमेशा स्वागत है।”
अमेरिका का एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने का कदम जहां भारतीय आईटी कंपनियों पर कम असर डालेगा, वहीं यह अमेरिका की नवाचार क्षमता को चुनौती दे सकता है। दूसरी ओर, जर्मनी जैसे यूरोपीय देश इस स्थिति को अवसर मानकर भारतीय पेशेवरों को आकर्षित करने में जुट गए हैं।



