समोसा-जलेबी पर चेतावनी लेबल की अफवाह का सच!

समोसा-जलेबी पर सिगरेट जैसे चेतावनी लेबल की खबर ने बाजार में हलचल मचा दी। लेकिन, क्या यह सच है या कोई गहरा राज? पीआईबी की गुप्त जांच ने खोला एक चौंकाने वाला सच। क्या है इस कहानी का असली सच?

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नई दिल्ली: हाल ही में एक खबर ने लोगों का ध्यान खींचा, जिसमें दावा किया गया कि समोसा और जलेबी जैसे खाद्य पदार्थों पर सिगरेट की तरह चेतावनी लेबल लगाने होंगे। यह खबर उत्तर भारत में खास तौर पर चर्चा का विषय बनी, जहां समोसा और जलेबी बेहद लोकप्रिय हैं। लोग हैरान थे कि आखिर इन खाद्य पदार्थों पर लेबल कैसे लगेगा। हालांकि, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट-चेक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि यह खबर पूरी तरह से आधारहीन थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसी कोई भी नीति या एडवाइजरी जारी नहीं की है। यह महज एक अफवाह थी।

स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 21 जून 2025 को एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें प्रस्ताव दिया गया कि सरकारी कार्यालयों, मंत्रालयों और सार्वजनिक स्थानों पर ‘तेल और चीनी बोर्ड’ लगाए जाएंगे। इन बोर्ड का उद्देश्य लोगों को अत्यधिक तेल और चीनी के सेवन से होने वाले नुकसानों के बारे में जागरूक करना है। यह कदम मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों, जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर, को रोकने के लिए उठाया गया है।

मोटापा: एक बढ़ता खतरा
The Lancet GBD 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में भारत में 18 करोड़ लोग मोटापे से प्रभावित थे। अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या बढ़कर 44.9 करोड़ हो सकती है। ऐसे में भारत मोटापे से प्रभावित लोगों की संख्या में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बना सकता है। NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में हर पांच में से एक बच्चा या वयस्क अधिक वजन या मोटापे का शिकार है।

सरकार का उद्देश्य: जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली
स्वास्थ्य मंत्रालय की यह पहल लोगों को अस्वास्थ्यकर खानपान की आदतों के प्रति सचेत करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है। इसमें किसी भी खाद्य पदार्थ पर प्रतिबंध लगाने या समोसा-जलेबी जैसे व्यंजनों पर लेबल लगाने की कोई बात नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2025 में देहरादून में 38वें राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन समारोह में देशवासियों से सक्रिय जीवन शैली अपनाने की अपील की थी। अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने तेल के उपयोग में 10% कटौती करने का सुझाव दिया था।

प्रस्तावित कदम
तेल और चीनी बोर्ड: सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर डिजिटल या स्थिर बोर्ड लगाए जाएंगे, जो अत्यधिक तेल और चीनी के सेवन से होने वाले नुकसानों की जानकारी देंगे।
स्वास्थ्य संदेश: सरकारी पत्राचार, जैसे पत्र, लिफाफे, नोटपैड और फोल्डर, पर मोटापा रोकथाम के संदेश छापे जाएंगे।
स्वस्थ विकल्पों को प्रोत्साहन: कार्यालयों में फल, सब्जियां, कम वसा वाले खाद्य पदार्थ और कम चीनी वाले पेय उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, सीढ़ियों का उपयोग, छोटे व्यायाम सत्र और पैदल चलने के रास्तों को बढ़ावा दिया जाएगा।

जागरूकता है मुख्य लक्ष्य
यह एडवाइजरी स्पष्ट करती है कि सरकार का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, न कि किसी खाद्य पदार्थ पर प्रतिबंध लगाना। आधिकारिक दस्तावेजों में ‘प्रतिबंध’ जैसे शब्दों का कोई उल्लेख नहीं है। बल्कि, ‘जीवनशैली में बदलाव’ और ‘स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा’ जैसे शब्दों पर जोर दिया गया है।

FSSAI का योगदान
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस अभियान को समर्थन देने के लिए कई दृश्य सामग्री (विजुअल कटेंट) जारी की हैं, जिन्हें विभिन्न संस्थान अपनी आवश्यकतानुसार अनुकूलित कर सकते हैं।
इस प्रकार, समोसा-जलेबी पर चेतावनी लेबल की खबर पूरी तरह से गलत थी। सरकार का ध्यान केवल जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर है।

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