नई दिल्ली। लखनऊ में आयोजित सैयद मोदी इंटरनेशनल सुपर 300 (Syed Modi Super 300) बैडमिंटन टूर्नामेंट में रविवार का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए भावनाओं का उतार-चढ़ाव लेकर आया। जहां महिला डबल्स में त्रीसा जॉली (Trisa Jolly) और गायत्री गोपीचंद (Gayatri Gopichand) की जोड़ी ने खिताब अपने नाम कर शानदार प्रदर्शन किया, वहीं अनुभवी खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) फाइनल तक पहुंचने के बावजूद जीत से दूर रह गए।
रोमांचक मुकाबले में त्रीसा–गायत्री की शानदार वापसी
महिला युगल फाइनल में भारतीय जोड़ी का सामना जापान की काहो ओसावा और माई तानाबे से था। मुकाबला उतार-चढ़ाव भरा रहा और तीन गेम तक चला। शुरुआत में भारतीय जोड़ी लय पकड़ने में संघर्ष करती नजर आई और पहला गेम हार गई। लेकिन इसके बाद त्रीसा और गायत्री ने रफ्तार पकड़ी और रणनीति में बदलाव करते हुए आक्रामक खेल दिखाया।
लगातार रैलियों, नेट ड्रॉप्स और स्मैश के दम पर भारतीय जोड़ी ने दूसरे और तीसरे सेट में शानदार प्रदर्शन किया और मुकाबला 17-21, 21-13, 21-15 से अपने नाम किया। मैच करीब 1 घंटा 16 मिनट तक चला, जो खुद इस बात का संकेत है कि यह जीत कितनी कठिन थी।
चोट से वापसी के बाद बड़ी उपलब्धि
गायत्री गोपीचंद पिछले पांच महीनों से कंधे की चोट के कारण कोर्ट से दूर थीं। वापसी के बाद यह भारतीय जोड़ी का केवल दूसरा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था। ऐसे में फाइनल में जीत न सिर्फ आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यह जोड़ी दोबारा अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म की ओर बढ़ चुकी है। पिछले साल भी इसी टूर्नामेंट में यह जोड़ी चैंपियन बनी थी और अब लगातार दूसरी बार खिताब जीतकर उन्होंने अपनी टॉप वरीयता को सही साबित किया है।
श्रीकांत ने किया संघर्ष, लेकिन जीत नहीं मिली
दूसरी ओर, पुरुष सिंगल्स में भारत की उम्मीदें किदांबी श्रीकांत से थीं। लेकिन उनका खिताबी इंतजार एक बार फिर बढ़ गया। उन्हें फाइनल मुकाबले में हांगकांग के जेसन गुनावन के हाथों कड़े मुकाबले में 16-21, 21-8, 20-22 से हार मिली। मध्य गेम में श्रीकांत ने शानदार वापसी कर मैच को बराबरी पर ला दिया था, लेकिन निर्णायक गेम में महत्वपूर्ण मौकों पर त्रुटियां भारी पड़ीं और जीत हाथ से निकल गई। यह मुकाबला करीब 67 मिनट तक चला।
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8 साल से खिताब का इंतजार जारी
श्रीकांत ने अपना अंतिम खिताब 2017 के फ्रेंच ओपन में जीता था। इसके बाद से कई बार वह फाइनल तक पहुंचे, लेकिन खिताब जीतने में सफल नहीं हुए। इस साल भी वह मलेशिया मास्टर्स सुपर 500 में उप विजेता रहे थे। भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों के लिए यह टूर्नामेंट भावनाओं का मिश्रण रहा, जहां त्रीसा और गायत्री ने भारतीय तिरंगा ऊंचा रखा, वहीं श्रीकांत के लिए यह एक और मौका था जो हाथ से फिसल गया। फिर भी, उनके प्रदर्शन ने संकेत दिया कि वह अभी भी प्रतिस्पर्धा में मजबूत खिलाड़ी हैं, और आने वाले टूर्नामेंट में उनसे उम्मीदें कायम रहेंगी।



