नई दिल्ली: दिवाली 2025 का उत्साह पूरे देश में फैल चुका है, बाजार रंग-बिरंगे सामानों से सजे हैं। लेकिन इस खुशी के बीच प्रदूषण की चिंता भी बढ़ रही है। पारंपरिक पटाखों से निकलने वाला धुआं और शोर हवा को जहरीला बना देते हैं। इसी समस्या का समाधान हैं ग्रीन पटाखे, ये न सिर्फ त्योहार को रोमांचक बनाते हैं, बल्कि हवा और कानों को भी बचाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में 18 से 21 अक्टूबर तक इनकी बिक्री और इस्तेमाल की इजाजत दी है। बर्स्टिंग सिर्फ सुबह 6-7 बजे और शाम 8-10 बजे तक ही। आइए, जानते हैं इनके प्रकार और असली वाले कैसे चुनें।
ग्रीन पटाखों के तीन अनोखे प्रकार
ग्रीन पटाखे CSIR-NEERI की रिसर्च से बने हैं, जो 2019 से बाजार में हैं। ये बेरियम नाइट्रेट जैसे हानिकारक केमिकल्स से मुक्त होते हैं। मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:
- SWAS (Safe Water Releaser): ये जलवाष्प छोड़ते हैं, जो धूल के कणों को फंसाकर हवा साफ रखते हैं। धुएं की बजाय पानी का गुबार पैदा करते हैं।
- STAR (Safe Thermite Cracker): सल्फर और पोटेशियम नाइट्रेट की मात्रा कम करके बनाए जाते हैं। इससे उत्सर्जन घटता है और शोर नियंत्रित रहता है।
- SAFAL (Safe Minimal Aluminium): एल्यूमिनियम और मैग्नीशियम को न्यूनतम रखकर धुआं व शोर दोनों कम करते हैं। ये पारंपरिक पटाखों से 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं।
ये सभी 110-125 डेसिबल तक सीमित शोर पैदा करते हैं, जबकि पुराने वाले 160 डेसिबल से ज्यादा।
असली ग्रीन पटाखे कैसे पहचानें?
नकली पटाखों का बाजार भी गर्म है, इसलिए सतर्क रहें। असली वाले की पहचान आसान है:
- QR कोड चेक: हर पैकेट पर NEERI का QR कोड होता है। मोबाइल से स्कैन करें, निर्माता का नाम, लाइसेंस नंबर और सर्टिफिकेशन दिखेगा। अगर स्कैन न हो या फर्जी डिटेल्स आएं, तो नकली है।
- सर्टिफिकेशन लेबल: पैकेजिंग पर CSIR-NEERI और PESO (Petroleum and Explosives Safety Organisation) का लोगो जरूर देखें। सिर्फ PESO लाइसेंस्ड फैक्ट्री से बने होते हैं।
- पैकेजिंग टिप्स: हरा लोगो या पारदर्शी पैकेट अकेले पर्याप्त नहीं। हमेशा लेबल पढ़ें हानिकारक केमिकल्स फ्री लिखा हो। अनलाइन बैन है, तो सिर्फ अप्रूvd दुकानों से खरीदें।
ये तरीके अपनाकर आप फेक से बच सकते हैं और सच्ची ग्रीन खुशी मना सकते हैं।
पर्यावरण अनुकूल दिवाली के फायदे
ग्रीन पटाखे न सिर्फ प्रदूषण घटाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित हैं। दिल्ली जैसे शहरों में ये ट्रायल से सफल साबित हो चुके हैं। इस दिवाली, रोशनी के साथ हवा को भी साफ रखें। CPCB मॉनिटरिंग करेगा, तो नियमों का पालन करें।



