नई दिल्ली: देश में शेर बढ़ रहे हैं। यह दावा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व शेर दिवस पर की है। उन्होंने कहा कि 2020 में शरों की संख्या 674 से बढ़कर 891 हो गई। एशियाई शेर (पैंथेरा लियो पर्सिका) सफल वन्यजीव संरक्षण का वैश्विक प्रतीक है। 1990 में केवल 284 शेरों से बढ़कर 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 891 हो गई है। 2020 से 32 प्रतिशत और पिछले एक दशक में 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
वह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से द्वारका के बरदा वन्यजीव अभयारण्य में विश्व शेर दिवस पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे। इसमें गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गुजरात के वन मंत्री मुलुभाई बेरा भी मौजूद थे।
इंसान और जीव एक साथ फल-फूल रहे
इस कार्यक्रम में मंत्री ने ऐसे भारत के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, जहां मानव और वन्यजीव एक साथ फल-फूल सकें। उन्होंने कहा कि यह गौरव की बात है कि एशियाई शेर आज दुनिया में कहीं मौजूद हैं तो वह गुजरात के गिर में हैं। हमारे अथक संरक्षण प्रयासों ने पिछले एक दशक में उनकी आबादी को दोगुना कर दिया है जिससे वैश्विक वन्यजीव संरक्षण की आशा जगी है।
143 साल बाद शेर बरदा क्षेत्र में वापस लौटे
सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा कि 180 करोड़ रुपये की लागत से नए आवासों, उन्नत पशु चिकित्सा सुविधाओं और इको-टूरिज्म अवसंरचना का उद्घाटन राज्य में शेर संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि 143 वर्षों के बाद शेर बरदा क्षेत्र में वापस लौट आए हैं जिससे पारिस्थितिक संतुलन बहाल हुआ है और राज्य की प्राकृतिक विरासत में वृद्धि हुई है।
एशियाई शेर की दहाड़ विरासत
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि गुजरात सक्रिय आवास प्रबंधन, मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों के मामले में अग्रणी बना रहेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि ‘‘एशियाई शेर की दहाड़ गुजरात का गौरव और भारत की विरासत बनी रहे।
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देश में शेरों की स्थिति
यह दिवस हर साल 10 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनियाभर में शेरों के संरक्षण और सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने शेरों के संरक्षण के लिए 2,927.71 करोड़ रुपये के कुल बजट वाली 10 वर्षीय परियोजना को स्वीकृति दी है। वन्यजीव स्वास्थ्य सेवा के लिए एक राष्ट्रीय रेफरल केंद्र को मंज़ूरी दी है जिसके लिए राज्य सरकार ने जूनागढ़ जिले के न्यू पिपलिया में 20.24 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। यह परियोजना वर्तमान में प्रगति पर है।
- गुजरात के सौराष्ट्र के 11 जिलों में ‘विश्व शेर दिवस’ का आयोजन भी किया गया। ये राजसी जानवर सौराष्ट्र के 11 जिलों में लगभग 35,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं।
- बरदा वन्यजीव अभयारण्य पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में 192.31 वर्ग किलोमीटर में फैला है। बरदा एशियाई शेरों के दूसरे घर के रूप में उभर रहा है। 2023 में इस क्षेत्र में शेरों के प्राकृतिक प्रवास के बाद शेरों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है जिनमें 6 वयस्क और 11 शावक शामिल हैं। यह अभयारण्य एक महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट और एशियाई शेरों के संरक्षण का एक प्रमुख क्षेत्र है।
- द्वारका-पोरबंदर-सोमनाथ पर्यटन सर्किट के पास होने के कारण, बरदा क्षेत्र में पर्यटन की बहुत संभावनाएं हैं। लगभग 248 हेक्टेयर क्षेत्र में एक सफारी पार्क बनाने की योजना है, जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित की गई है। इस कार्यक्रम में लगभग 180.00 करोड़ रुपये की लागत के वन्यजीव संरक्षण कार्यों का भी शुभारंभ किया जाएगा।
उठाए गए कदम
- 2023 में इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (IBCA) लॉन्च किया गया था। यह शेरों सहित सभी बिग कैट्स के संरक्षण को मजबूत करता है।
- गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य के अतिरिक्त शेरों के लिए पर्यावास विकसित करने के उद्देश्य से ग्रेटर गिर संकल्पना लाई गई।
- गिरनार, पनिया और मिटियाला अभयारण्य अधिसूचित किए गए ताकि क्षेत्र का विस्तार किया जा सके।
- मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में एशियाई शेरों को बसाने के लिए एशियाटिक लायन रीइंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट शुरू किया गया।
- सिम्बा (SIMBA), ई-गुजफॉरेस्ट और अलर्ट जनरेशन सिस्टम जैसी एआई-संचालित प्रणालियां विकसित की गईं ताकि शेरों की निगरानी की जा सके।



