नई दिल्ली: राजधानी में नेशनल स्टैटिकल्स ऑफिस (NSO) की बैठक में पर्सनल डेटा की सिक्योरिटी और साक्ष्य आधारित नीति निर्माण पर बल दिया गया। बैठक में भारत के स्टैटिकल्स सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के साथ संरेखित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इस सैनिटाइजेशन कम रिव्यू मीटिंग में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सांख्यिकीय सलाहकार मौजूद रहे।
मुख्य बिंदु
- NSO ने डेटा के मजबूत अनामीकरण और विकेन्द्रीकृत भंडारण पर जोर दिया
- MeitY ने निजता को एक मौलिक अधिकार बताया
- नीति आयोग ने वैज्ञानिक निर्णय लेने का आह्वान किया
- भारत 20 साल बाद संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग के लिए चुना गया
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने बढ़ते डेटा के उपयोग के युग में निजता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम सभी निजता का सम्मान करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी जानते हैं कि निजता मौलिक अधिकार है। हमें सावधान रहने की आवश्यकता है कि व्यक्तिगत निजता बनी रहे।
उन्होंने चुनौती का भी जिक्र किया और कहा कि बिजली के बिल, मेडिकल रिकॉर्ड या वित्तीय जानकारी जैसे डेटासेट में अक्सर व्यक्तिगत आयाम होता है। हमें इस डेटा का उपयोग करने, डेटा का विश्लेषण करने, इस पर मॉडल बनाने, निजता को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि किसी पर कोई प्रभाव न पड़े।
बदलाव पर जोर
प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग, जोखिमों को डिसेंट्रलाइज्ड करने और डेटाबेस संबंधित एजेंसी और इकाई के पास रखने, अनामीकरण तंत्र और विकेन्द्रीकृत डेटाबेस सुरक्षित एपीआई के माध्यम से जुड़े हुए हैं। नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने अधिक वैज्ञानिक निर्णय लेने की दिशा में बदलाव का आह्वान किया। कहा कि सरकार को डेटा-आधारित निर्णय लेने, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की ओर बढ़ना होगा और आप साक्ष्य प्रदान करने वाले हैं। आपको इन दिशाओं में आगे बढ़ना शुरू करने और अपने कौशल में सुधार करने की आवश्यकता है।
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने सांख्यिकीय प्रणाली द्वारा जारी आंकड़े ऐतिहासिक रूप से भारत में नीति निर्माण का आधार पर जोर दिया। उन्होंने समय पर डेटा तैयार करने की आवश्यकता, विश्वसनीयता को बनाए रखने पर भी बल दिया। उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों के सांख्यिकी सलाहकारों को बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करने और सरकारी प्रणाली से परे डेटा स्रोतों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विश्वसनीय, समय पर और उपयोगकर्ता-केंद्रित डेटा प्रदान करने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण की भी बात कही।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली के आधुनिकीकरण व सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से अपने मंत्रालय के कार्यक्रमों को रेखांकित करते हुए दिन की चर्चाओं का संदर्भ निर्धारित किया।
डॉ. सौरभ गर्ग ने इस बात पर भी जोर दिया कि सांख्यिकी सलाहकार केवल आंकड़ों के संरक्षक नहीं हैं, बल्कि साक्ष्य-आधारित शासन में सक्रिय भागीदार भी हैं। उन्होंने ई-सांख्यिकी पोर्टल पर मंत्रालय की प्रगति पर प्रकाश डाला, जो आधिकारिक डेटासेट के लिए एक एकीकृत मंच है, जिसमें 2025-26 तक कई मंत्रालयों के प्रमुख डेटासेट को एकीकृत करने की योजना है ताकि पहुंच और सहभागिता में बढ़ोतरी हो सके। डॉ. सौरभ गर्ग ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में विशेष रूप से विकसित भारत 2047 के संदर्भ में उच्च गुणवत्ता वाले, समय पर और विश्वसनीय डेटा की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए नवाचार, डेटा-आधारित निर्णय लेने और सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
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इन विषयों पर हुआ प्रजेंटेशन
डेटा मानकीकरण और सामंजस्य, सतत विकास लक्ष्य निगरानी को सुदृढ़ करना, राष्ट्रीय लेखा के लिए डेटा आवश्यकताओं को पूरा करना, औद्योगिक सांख्यिकी को बढ़ाना और बुनियादी ढांचे की निगरानी व प्रदर्शन मूल्यांकन को आगे बढ़ाना जैसे विषयों पर कई प्रस्तुतियां दी गईं। अधिकतर चर्चाएं डेटा की गुणवत्ता में सुधार, प्रशासनिक डेटा अंतराल को पाटने, मेटाडेटा प्रबंधन को मजबूत करने, उभरती प्रौद्योगिकियों (एआई, एमएल व बिग डेटा) का उपयोग करने और सरकारी संस्थाओं में डेटा-साझाकरण ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित थीं।



