नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट छोड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। बुधवार को नए विधायक के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोलकाता की भवानीपुर सीट अपने पास रखेंगे और इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे।
पार्टी के निर्णय पर लगाई मुहर
हालिया विधानसभा चुनाव में दो सीटों नंदीग्राम और भवानीपुर से ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले शुभेंदु अधिकारी ने पिछले दिनों ही घोषणा की थी कि वे 10 दिनों के भीतर एक सीट खाली कर देंगे। बुधवार को विधानसभा में शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने सस्पेंस खत्म करते हुए भवानीपुर को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना। शुभेंदु ने कहा, “पार्टी नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है। भवानीपुर की जीत ने राज्य की राजनीति को नया संदेश दिया है।”
ममता बनर्जी को दोनों गढ़ में दी शिकस्त
शुभेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने न केवल अपने पुराने गढ़ नंदीग्राम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पटखनी दी, बल्कि ममता के अपने गढ़ भवानीपुर में भी उन्हें भारी मतों से पराजित किया। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में भी नंदीग्राम से ममता बनर्जी को शुभेंदु के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस तरह ममता बनर्जी लगातार दो बार, दो अलग-अलग सीटों से शुभेंदु अधिकारी से हार चुकी हैं।
नंदीग्राम से भवानीपुर तक का सफर
नंदीग्राम, शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक करियर का केंद्र रहा है। साल 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ही उन्हें राज्य स्तर का बड़ा नेता बनाया था। हालांकि कोलकाता की भवानीपुर सीट पर मिली जीत को भाजपा के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि भवानीपुर सीट अपने पास रखकर शुभेंदु यह संदेश देना चाहते हैं कि अब भाजपा की पकड़ बंगाल के सत्ता केंद्र यानी कोलकाता पर मजबूत हो चुकी है।
अब नंदीग्राम में क्या होगा?
शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफा देने के बाद अब नंदीग्राम सीट पर अगले 6 महीनों के भीतर उपचुनाव कराए जाएंगे। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि भाजपा इस महत्वपूर्ण सीट से किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी, ताकि शुभेंदु की विरासत को वहां बरकरार रखा जा सके।



