बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रतिष्ठित गढ़ ‘बारामती’ से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस पार्टी ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ मैदान में उतारे गए अपने प्रत्याशी आकाश विश्वनाथ मोरे का नाम वापस लेने का औपचारिक फैसला किया है। इस कदम के बाद अब बारामती सीट से सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही है।
बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव, पूर्व उपमुख्यमंत्री और दिग्गज नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के कारण खाली हुई सीट पर हो रहा है। अजित पवार, जिनका 28 जनवरी 2026 को एक विमान दुर्घटना में दुखद निधन हो गया था, इस क्षेत्र से आठ बार विधायक रहे थे। उनके सम्मान में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को चुनावी मैदान में उतारा है।
कांग्रेस ने क्यों बदला अपना फैसला?
इससे पहले कांग्रेस ने वरिष्ठ वकील आकाश मोरे को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया था। हालांकि, गुरुवार (9 अप्रैल) को नामांकन वापसी के आखिरी दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल ने उम्मीदवारी वापस लेने का ऐलान किया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और अजित पवार के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए लिया गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सभी दलों से अपील की थी कि बारामती का चुनाव निर्विरोध कराया जाए। एनसीपी (शरद पवार) गुट ने पहले ही इस सीट पर कोई उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया था।
भावुक चुनावी माहौल
नामांकन दाखिल करने के दौरान सुनेत्रा पवार काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह चुनाव जीत-हार से कहीं ज्यादा अजित दादा की विरासत और उनके काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। बारामती के स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं के भारी दबाव और भावनात्मक अपील के बीच, कांग्रेस ने ‘बड़े दिल’ का परिचय देते हुए अपने पैर पीछे खींच लिए हैं।
बारामती सीट पर अब तक कुल 23 अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपने नामांकन वापस ले लिए हैं। अब केवल कुछ ही औपचारिकताएं शेष हैं, जिसके बाद चुनाव आयोग सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा कर सकता है। बारामती के इतिहास में यह एक दुर्लभ क्षण होगा जब पवार परिवार की किसी सदस्य को बिना किसी चुनावी संघर्ष के विधानसभा भेजा जाएगा।



