नई दिल्ली: RODHS-2025 के अंतिम दिन चार बड़े मुद्दों पर गहरी चर्चा हुई। चर्चा में व्यक्ति को केंद्र में रखने वाली स्वास्थ्य प्रणाली, पैसा कहां से और कैसे आएगा, डेटा और एआई के लिए कानून-नियम और सभी देश मिलकर कैसे काम करें जैसे विषय शामिल थे। विशेषज्ञों ने कहा कि सिर्फ नई तकनीक लाने से कुछ नहीं होगा, जब तक मजबूत कानून, आपस में जुड़ने वाली व्यवस्था और सबको साथ लेकर चलने की नीति न हो।
भारत का अनुभव बना दूसरों के लिए मिसाल
उत्तर प्रदेश ने दिखाया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के साथ “स्कैन एंड शेयर” सुविधा और हर नागरिक का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड कैसे तेजी से बनाया जा सकता है। श्रीलंका ने बताया कि अब वे सिर्फ डेटा इकट्ठा नहीं कर रहे, बल्कि उसे असल मरीजों तक इलाज पहुंचाने में लगा रहे हैं। यूनिसेफ ने कहा कि AI का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करना होगा ताकि इलाज की गुणवत्ता बढ़े और कोई पीछे न छूटे।
पैसा सबसे बड़ी चुनौती, नया रास्ता निकाला
भारत, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड और तिमोर-लेस्ते ने माना कि दाता देशों पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा। जरूरत है अपने बजट में डिजिटल स्वास्थ्य के लिए स्थायी जगह बनाने की, सरकारी-निजी भागीदारी बढ़ाने की और स्वास्थ्य बीमा को मजबूत करने की। पैनल ने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य को खर्च नहीं, निवेश समझना होगा।
SEA-DAC: दक्षिण-पूर्व एशिया का अपना डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क
सबसे बड़ी घोषणा दक्षिण-पूर्व एशिया डिजिटल स्वास्थ्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहयोगात्मक नेटवर्क (SEA-DAC) बनाने की रही। यह सदस्य देशों के नेतृत्व वाला नया मंच होगा जो FHIR मानकों को लागू करेगा, ज्ञान और अनुभव बांटेगा और गलतियां दोहराने से बचाएगा। सभी देशों ने एक स्वर में कहा, हमारी तकनीकी तैयारी अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सबका लक्ष्य एक है, मजबूत डिजिटल शासन और जुड़ी हुई स्वास्थ्य व्यवस्था।
अंतिम संदेशः तकनीक नहीं, इंसान है केंद्र में
डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ और भारत सरकार के अधिकारियों ने एक स्वर में कहा, डिजिटल स्वास्थ्य सिर्फ नया ऐप या सॉफ्टवेयर नहीं है। यह फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को ताकत देने, गांव के आखिरी व्यक्ति तक इलाज पहुंचाने और डिजिटल खाई को स्वास्थ्य खाई न बनाने की यात्रा है। डिजिटल स्वास्थ्य को देश का राष्ट्रीय बजट में स्थायी जगह देनी होगी और AI का इस्तेमाल नैतिक तरीके से करना होगा। तीन दिन के इस सम्मेलन ने साफ संदेश दिया – दक्षिण-पूर्व एशिया अब डिजिटल स्वास्थ्य में दुनिया को रास्ता दिखाने को तैयार है।



