सोलर एनर्जी: पीवी मॉड्यूल निर्माण कैपिसिटी पहुंची 100 गीगावॉट

भारत तेजी से अक्षय ऊर्जा पर शिफ्ट हो रहा है। इसमें बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा का है। 2030 तक इससे 500 गीगावाॅट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

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नई दिल्ली: भारत ने सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। स्वीकृत मॉडल और निर्माताओं की सूची (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल 100 गीगावाट तक सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण क्षमता पहुंच गई है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उपयोग में देश और आत्मनिर्भर बना है और सोलर मैन्यूफेक्चरिंग ईकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ा है। 

2030 तक 500 गीगावॉट है टारगेट

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, ‘सौर पीवी मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2014 में केवल 2.3 गीगावाट थी। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा (Non-fossil energy) क्षमता के लक्ष्य की ओर हमारे मार्ग को मजबूत करती है।’

चार साल में 12 गुना की उछाल

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने 2019 में एएलएमएम आदेश जारी किया था। सौर पीवी मॉड्यूल के लिए पहली एएलएमएम सूची मार्च 2021 में लगभग 8.2 गीगावॉट की प्रारंभिक सूचीबद्ध क्षमता के साथ प्रकाशित की गई थी। केवल चार वर्षों में यह क्षमता बारह गुना से अधिक बढ़कर 100 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गई है। निर्माताओं की संख्या भी बढ़ी है। 2021 में 21 निर्माता था जो अब बढ़कर 100 हो गए हैं। ये वर्तमान में 123 विनिर्माण इकाइयां चला रहे हैं।

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