नई दिल्ली | भारत सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को औपचारिक श्रम शक्ति का हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ी प्रगति की है। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में बताया कि सरकार ने न केवल इन श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code) 2020 को लागू कर दिया है, बल्कि इन्हें अब आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का सीधा लाभ भी मिलेगा।
1. एग्रीगेटर मॉड्यूल: कंपनियों की जिम्मेदारी तय
सरकार ने दिसंबर 2024 में ई-श्रम पोर्टल पर एग्रीगेटर मॉड्यूल शुरू किया है। इसके माध्यम से प्रमुख कंपनियाँ अपने साथ जुड़े कामगारों का पंजीकरण सुनिश्चित कर रही हैं।
- शामिल प्रमुख कंपनियाँ: Zomato, Blinkit, Swiggy, Uber, Ola, Amazon, Zepto, Porter, Rapido, Urban Company, Ecom Express और Uncle Delivery
2. सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020: कानूनी अधिकार
21 नवंबर 2025 से लागू हुई यह संहिता गिग वर्कर्स के लिए सुरक्षा का एक व्यापक ढांचा तैयार करती है, जिसमें शामिल हैं:
- जीवन और विकलांगता बीमा (Life & Disability Insurance)
- स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ (Health & Maternity Benefits)
- वृद्धावस्था सुरक्षा (Old Age Protection)
- एक विशेष सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना।
3. बजट 2025-26: कल्याणकारी उपाय
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में इन श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:
- आयुष्मान भारत (PM-JAY): गिग वर्कर्स को अब 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।
- UAN कार्ड: पंजीकरण के बाद पहचान पत्र और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जारी करना।
- डेटा मैपिंग: ई-श्रम और पीएम-जेएवाई (PMJAY) के बीच तकनीकी तालमेल बिठाया गया है ताकि लाभ सीधे पात्र श्रमिक तक पहुंचे।
4. भविष्य की तैयारी
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2021 के 77 लाख से बढ़कर 2030 तक 2.35 करोड़ होने की उम्मीद है। इस बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने 2025 में तीन विशेष राष्ट्रव्यापी पंजीकरण अभियान चलाए हैं ताकि कोई भी श्रमिक सुरक्षा चक्र से बाहर न रहे।



