भारत में सबसे पहले सूरज की किरणें प्राप्त करने वाला अरुणाचल अब उतनी ही तेज विकास की सौगातें प्राप्त भी कर रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने आज अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में 5,100 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।
पिछली सरकारों पर किया हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान पिछली सरकारों पर जमकर हमला किया। कुछ राजनीतिक दलों पर कम आबादी और केवल दो लोकसभा सीटों के कारण अरुणाचल प्रदेश की उपेक्षा करने के आरोप लगाए। साथ ही कहा 2014 के बाद से ‘राष्ट्र प्रथम’ का सिद्धांत अपनाते हुए सरकार के मूल मंत्र – ‘नागरिक देवोभव’ को दोहराया। जिस कारण पूर्वोत्तर 2014 के बाद विकास प्राथमिकताओं का केंद्र बन गया।
पूर्वोत्तर के आठ राज्य अष्टलक्ष्मी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को अष्टलक्ष्मी की उपमा देते हुए इस क्षेत्र में विकास की जरूरतों पर बात की। मोदी ने कहा पिछली सरकार के दौरान, अरुणाचल प्रदेश को दस वर्षों में केंद्रीय करों से केवल 6,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि हमारी सरकार के तहत अरुणाचल को इसी अवधि में 16 गुना अधिक – एक लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा केवल कर हिस्सेदारी से संबंधित है, और इसमें राज्य में कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं और प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं के तहत अतिरिक्त व्यय शामिल नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि अरुणाचल में आज इतना व्यापक और तेज़ विकास दिख रहा।
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कौन कौन सी परियोजना हैं शामिल
इस दौरान प्रधानमंत्री ने ईटानगर में 3,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली दो प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखी। हीओ जलविद्युत परियोजना (240 मेगावाट) और टाटो-I जलविद्युत परियोजना (186 मेगावाट) अरुणाचल प्रदेश के सियोम उप-बेसिन में विकसित की जाएंगी। तवांग में 9,820 फीट से भी अधिक की ऊँचाई पर एक कन्वेन्शन सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।




