नालंदा: बिहार का नालंदा जिला केवल ज्ञान और शिक्षा की धरोहर के लिए ही नहीं बल्कि अपनी धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के लिए भी खास पहचान रखता है। इसी कड़ी में नालंदा मुख्यालय बिहार शरीफ से करीब 15 किलोमीटर दूर गिरियक प्रखंड के घोसरावां गांव में स्थित मां आशापुरी मंदिर हर साल नवरात्रि के मौके पर चर्चा में रहता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक यहां महिलाओं और पुरुषों दोनों का ही गर्भगृह में प्रवेश वर्जित रहता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
क्यों है गर्भगृह में प्रवेश वर्जित?
मंदिर समिति के सदस्य अजीत कुमार उर्फ गुड्डू बताते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों तक यहां विशेष तांत्रिक पूजा होती है। इस दौरान केवल तीन पुजारी ही गर्भगृह में प्रवेश करते हैं और सुबह-शाम 4-5 घंटे तक मंत्रोच्चार और तांत्रिक विधियों से पूजा होती है। मान्यता है कि इस पूजा के समय नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। उनका महिलाओं पर बुरा असर न पड़े और पूजा भंग न हो, इसलिए गर्भगृह में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। यही नियम पुरुषों के लिए भी लागू होता है।

परंपरा 9वीं शताब्दी से जुड़ी
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परंपरा 9वीं शताब्दी से चली आ रही है। उस समय नालंदा और इसके आसपास का इलाका बौद्ध धर्म के साधना केंद्रों में गिना जाता था। बौद्ध भिक्षु यहां आकर तंत्र-मंत्र की साधना करते थे। नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान और पूजा का आयोजन होता था, जो आज भी उसी आस्था के साथ निभाया जा रहा है।
हवन के बाद खुलते हैं द्वार
नवरात्रि के आखिरी दिन मंदिर में विशेष हवन किया जाता है। हवन के साथ ही नकारात्मक शक्तियों को शुद्ध किया जाता है और फिर मंदिर के गर्भगृह के द्वार महिलाओं और पुरुषों के लिए खोल दिए जाते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।
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देशभर से आते हैं श्रद्धालु
मां आशापुरी मंदिर की ख्याति सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। नवरात्रि के दिनों में झारखंड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश और बंगाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां मांगी गई मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। मां आशापुरी के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा ही इस मंदिर को खास बनाती है। नवरात्रि में यहां की रौनक और भक्तों की भीड़ देखने लायक होती है।



