नई दिल्ली: ओपीएसए की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर पहल के तहत आठ सक्रिय क्लस्टरों में से पांच दूसरे चरण में पहुंच चुके हैं। औद्योगिक साझेदारी पर पूर्ण ज़ोर दिया जा रहा है। इससे उद्योग और शिक्षा जगत के बीच संबंध बढ़ रहे हैं। नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है। शोध परिणामों के अनुवाद बेहतर होते हैं और सुनिश्चित होता है कि हमारे वैज्ञानिक प्रयास से व्यावसायीकरण की संभावनाओं को गति मिले।
ये बातें 9-10 सितंबर को विशाखापत्तनम में विजाग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर एएमटीजेड द्वारा आयोजित तीसरे ऑल क्लस्टर्स मीट में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय-ओपीएसए के वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी ने कहीं। इस मीट की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने की। ओपीएसए की सलाहकार/वैज्ञानिक-जी डॉ. राकेश कौर भी विचार-विमर्श में शामिल हुए। ओपीएसए के वैज्ञानिक-एफ डॉ. विशाल चौधरी ने पिछली सभा की कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत की।
2020 में परिकल्पित, ओपीएसए की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर पहल क्षेत्र-आधारित नेटवर्क के रूप में, अनुसंधान अनुवाद और नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, उद्योग, सरकार और स्टार्ट-अप के बीच साझेदारी को उत्प्रेरित करता है। यह विभिन्न क्षेत्रगत सहयोग से प्रमुख कार्यक्रम के रूप में परिपक्व हो गया है।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. सूद ने अपने मुख्य भाषण में स्थानीय चुनौतियों, औद्योगिक प्रगति के समाधान और क्षेत्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की समग्र वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समूहों की उल्लेखनीय क्षमता का उल्लेख किया। उन्होंने पूरक विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए सुदृढ़ अंतर-क्लस्टर सहयोग को बढ़ावा देकर क्लस्टर पारिस्थितिकी तंत्र की प्रभावशीलता और वैश्विक स्थिति मज़बूत करने पर ज़ोर दिया।
S&T के प्रतीक चिह्न का अनावरण
उद्घाटन सत्र में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. सूद ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी (S&T) क्लस्टर के आधिकारिक प्रतीक चिन्ह का अनावरण किया। 4-5 दिसंबर को S&T क्लस्टर पर आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए वेबपेज शुरू किया। S&T क्लस्टर पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में विषयवस्तु आधारित तकनीकी सत्र, वैश्विक क्लस्टरों के साथ गोलमेज चर्चा और समय के साथ विकसित प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी शामिल होगी।
वन हेल्थ पर सार-संग्रह जारी
प्रो. सूद ने बेंगलुरु विज्ञान और प्रौद्योगिकी (बीईएसटी) क्लस्टर द्वारा तैयार वन हेल्थ पर सार-संग्रह भी जारी किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर डैशबोर्ड प्रस्तुत किया गया, जिसमें आठ क्लस्टरों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी प्रदर्शित की गई। इन उन्नत प्रौद्योगिकियों को अभी उपयोग में लाया जा रहा है।
प्रोफेसर सूद ने विशाखापत्तनम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर द्वारा स्थापित ई-कचरा प्रबंधन को समर्पित सुविधा संयंत्र, एयंत्रम (ईवाईएएनटीआरएएम) का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर और उपभोक्ता उपकरण सहित विभिन्न प्रकार के बेकार इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित संग्रहण, पृथक्करण, निराकरण और पुनर्चक्रण में सक्षम है।
इन क्लस्टरों प्रस्तुत की योजना
दो दिवसीय बैठक में हैदराबाद का अनुसंधान और नवाचार सर्किल बीईएसटी क्लस्टर, भुवनेश्वर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर, पुणे नॉलेज क्लस्टर, उत्तरी क्षेत्र एस एंड टी क्लस्टर पीआई आरएएचआई, जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर, दिल्ली अनुसंधान कार्यान्वयन और नवाचार और विजाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लस्टर सहित सभी आठ क्लस्टरों ने अपने चल रहे कार्य, परिणामों और योजनाएं प्रस्तुत कीं, जो अंतर-क्लस्टर सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी पर केंद्रित हैं।
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प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने क्या कहा
प्रो. सूद ने कहा कि क्लस्टरों को गतिशील, समाधान-संचालित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित होना चाहिए, जो आत्मनिर्भरता और उद्योगों के साथ मज़बूत संबंधों पर आधारित हो। इससे स्थानीय और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान और नवोन्मेष को बढ़ावा मिलेगा, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
क्लस्टरों को जल पुनर्जीवन, ई-कचरा प्रबंधन और स्मार्ट कृषि पर उनके द्वारा बनाई गई सुगम तकनीकों को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहित स्वरूप तैयार करने की सलाह दी। ये क्लस्टरों के सहयोग से स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीकों को व्यापक रूप से प्रदर्शित करने में सहायक होंगे। क्लस्टरों को उपयोगकर्ता एजेंसियों द्वारा अपनाई गई विकसित प्रौद्योगिकियों को अपने क्षेत्रों में इस्तेमाल करने के लिए अन्य क्लस्टरों को हस्तांतरित करने का भी सुझाव दिया।



