नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी US-ईरान तनाव और बढ़ते संघर्ष के बीच अब वैश्विक इंटरनेट सिस्टम पर गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार लाल सागर (रेड सी) में मौजूद सबमरीन फाइबर ऑप्टिक केबलों को नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ गई है, जिससे बड़े पैमाने पर इंटरनेट बाधा उत्पन्न हो सकती है।
हालांकि ईरान ने आधिकारिक रूप से इन केबलों को नुकसान पहुंचाने की कोई धमकी नहीं दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर कई दावों में यह चेतावनी दी गई है कि हालात बिगड़ने पर ऐसी घटनाएं संभव हैं। यमन के हूती विद्रोही समूह की ओर से भी पहले कई बार रेड सी में केबलों को काटने की धमकी दी जा चुकी है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर 2025 में भी रेड सी में केबल कटने की एक बड़ी घटना हुई थी, जिसमें एक वाणिज्यिक जहाज के एंकर के कारण चार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केबलें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसका असर पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों की इंटरनेट सेवाओं पर देखने को मिला था।
इन केबलों में “साउथ ईस्ट एशिया–मिडिल ईस्ट–वेस्टर्न यूरोप 4”, “इंडिया-मिडिल ईस्ट-वेस्टर्न यूरोप”, “FALCON GCX” और “यूरोप-इंडिया गेटवे” जैसी महत्वपूर्ण संचार लाइनें शामिल हैं, जो वैश्विक डेटा ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा संभालती हैं।
क्या कह रही इंटरनेशनल केबल प्रोटेक्शन कमेटी
इंटरनेशनल केबल प्रोटेक्शन कमेटी के अनुसार, हर साल औसतन 60 से अधिक केबल फॉल्ट दर्ज होते हैं, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत घटनाएं जहाजों के एंकर से टकराने के कारण होती हैं। हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के चलते जानबूझकर हमले की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इन केबलों के जरिए वित्तीय लेनदेन, क्लाउड सेवाएं, वीडियो कॉल, ईमेल और यहां तक कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा डेटा ट्रैफिक भी गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक डिजिटल सिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
भारत पर संभावित असर:
भारत पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। सितंबर 2025 की घटना के दौरान भारत में इंटरनेट पूरी तरह बंद तो नहीं हुआ था, लेकिन कई नेटवर्क में स्लोडाउन और आउटेज देखने को मिला था।
भारत में लगभग 17 अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबलें 14 लैंडिंग स्टेशनों—मुंबई, चेन्नई, कोच्चि, तूतीकोरिन और तिरुवनंतपुरम—में जुड़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेड सी मार्ग प्रभावित होता है तो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्लाउड सेवाएं और ऑनलाइन लेनदेन पर असर पड़ सकता है।
विशेष रूप से भारत का लगभग दो-तिहाई इंटरनेट ट्रैफिक मुंबई से होकर गुजरता है, जो नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव और जोखिम का कारण बन सकता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ भारत समेत कई देशों के लिए इंटरनेट सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गई है।



