नई दिल्ली: PM नरेंद्र मोदी ने गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद स्वतः छिन जाने वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक का जोरदार बचाव किया है। शुक्रवार को उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब जेल जाने पर एक क्लर्क की नौकरी चली जाती है तो फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी क्यों बचनी चाहिए। उन्होंने इस विधेयक का विरोध कर रही विपक्षी पार्टियों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कानून भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का हिस्सा है और इसके दायरे में कोई भी नहीं होगा।
क्या है 130वां संविधान संशोधन विधेयक
केंद्र सरकार ने हाल ही में मॉनसून सत्र में यह विधेयक पेश किया है। इस विधेयक में यह प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी गंभीर आरोप में 30 दिन या उससे ज्यादा तक हिरासत में रहता है तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी। सदन में इस विधेयक को लेकर भारी हंगामा हुआ था, जिसके बाद पीएम मोदी ने इसका बचाव करते हुए अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में कोई छूट नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार पर इतने सालों में भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार की एक पूरी सीरीज चली। उन्होंने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कोई भी व्यक्ति कार्रवाई के दायरे से बाहर नहीं होना चाहिए। उन्होंने मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा, “आज कानून है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी को 50 घंटे भी हिरासत में रख दिया जाए तो वह सस्पेंड हो जाता है। लेकिन यदि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री या प्रधानमंत्री है तो वह जेल में रहकर भी सत्ता का सुख पा सकता है। यह कैसे हो सकता है?” पीएम मोदी ने पिछले कुछ सालों के उदाहरणों का जिक्र किया, जहां जेल से ही फाइलों पर दस्तखत किए गए और सरकारी आदेश निकाले गए। उन्होंने कहा कि यदि नेताओं का यही रवैया रहेगा तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कैसे लड़ी जाएगी।
पीएम भी दायरे में: 30 दिन में नहीं मिली बेल तो कुर्सी जाएगी
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान हर जनप्रतिनिधि से ईमानदारी और पारदर्शिता की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा, “हम संविधान की मर्यादा को तार-तार होते नहीं देख सकते। इसलिए एनडीए सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसा कानून लाई है, जिसके दायरे में देश का प्रधानमंत्री भी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून जब बन जाएगा तो प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री, उसे गिरफ्तारी के 30 दिन के भीतर जमानत लेनी होगी। अगर 31वें दिन भी जमानत नहीं मिलती है, तो उसे अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ेगी।
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विपक्ष पर हमला: “जो जमानत पर हैं, वे कर रहे हैं विरोध”
पीएम मोदी ने जनता से सवाल करते हुए पूछा कि क्या जेल से सरकार चलनी चाहिए? उन्होंने कहा कि जो लोग जेल जाते हैं, उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने इस विधेयक का विरोध कर रही कांग्रेस, लेफ्ट और आरजेडी जैसी पार्टियों पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, “जो जमानत पर बाहर घूम रहे हैं, वे इस कानून का विरोध कर रहे हैं। इन्हें लगता है कि अगर यह कानून बन गया तो उनके सारे सपने चकनाचूर हो जाएंगे। इसलिए ये लोग बौखलाए हुए हैं और जनहित के कामों का भी विरोध कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि जिसने पाप किया होता है, वही उसे छिपाने की कोशिश करता है।



