नई दिल्ली। कल 2 दिसंबर को संसद के हॉल में हवा गरम रही। लोकसभा-राज्यसभा में कृषि से लेकर स्वास्थ्य तक के मुद्दों पर सांसदों ने सरकार को घेरा। मंत्रियों ने फसल बर्बादी, ग्रामीण रोजगार, नवीकरणीय ऊर्जा और दवाओं की क्वालिटी पर खुलासे किए। महाराष्ट्र की बाढ़ से 224 जिंदगियां लील ली गईं, केरल के सुपारी बागान बीमार पड़ गए, और बच्चों की जान लेने वाले कफ सिरप ने सदन को झकझोर दिया। ऊपर से केंद्र का राज्यों पर दबाव स्वास्थ्य बजट को जीडीपी का 8% तक ले जाओ। क्या ये आंकड़े वाकई बदलाव लाएंगे, या सिर्फ कागजी कार्रवाई साबित होंगे? आइए, कल की बहस के हाइलाइट्स पर नजर डालें।
मनरेगा: 68,000 करोड़ की बौछार, ग्रामीण भारत को सांस
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में साफ कहा कि 2025-26 के लिए मनरेगा का खजाना खुला है। 26 नवंबर तक राज्यों को 68,393 करोड़ रुपये ट्रांसफर हो चुके हैं। इसमें मजदूरी पर 57,853 करोड़ और बाकी सामान-अडमिन पर 10,540 करोड़। लेकिन सवाल वही पुराना: क्या ये पैसे गांवों तक पहुंच पाएंगे, या रास्ते में ही गुम हो जाएंगे? चौहान ने दावा किया कि ये फंडिंग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, खासकर बेरोजगारी के इस दौर में।
महाराष्ट्र की तबाही: बाढ़ ने लील ली फसलें, 224 मौतें
महाराष्ट्र में मानसून की विदाई गिफ्ट भारी पड़ी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को बताया कि 2025 की बाढ़-बारिश ने 224 लोगों की जान ले ली, 599 मवेशी मारे गए, 3,598 घर तबाह हो गए। सबसे बुरी मार फसलों पर 75.42 लाख हेक्टेयर जमीन बर्बाद। राय ने कहा, राहत का काम जोरों पर है, लेकिन विपक्ष ने केंद्र की तैयारी पर सवाल उठाए। क्या ये आंकड़े सिर्फ स्टेटिस्टिक्स हैं, या असल में किसानों का दर्द?
केरल के सुपारी किसान परेशान: रोग ने चुराई 20% पैदावार
दक्षिण के हरे-भरे बागानों में सोग का माहौल। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में खुलासा किया कि केरल के कासरगोड में सुपारी की फसल पर ‘पत्ती धब्बा’ बीमारी ने हमला बोला। राज्य सरकार की टास्क फोर्स ने रिपोर्ट दी है कि पैदावार में 5 से 20% तक की गिरावट। चौहान ने केंद्र की मदद का भरोसा दिया, लेकिन किसान पूछ रहे हैं: कब तक ये महामारी जैसी बीमारियां फसलों को निगलती रहेंगी?
खेतों की रानियां: 77% महिलाएं कमर कसकर खड़ी, ई-श्रम पर 8 करोड़ रजिस्टर्ड
कृषि में महिलाओं की ताकत को सलाम। राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में 76.9% महिलाएं खेती-बाड़ी में जुटी हैं। ई-श्रम पोर्टल पर 16.25 करोड़ वर्कर्स रजिस्टर्ड, जिनमें 8.04 करोड़ महिलाएं। ठाकुर ने FASAL प्रोग्राम का जिक्र किया कि सैटेलाइट से 11 मुख्य फसलों का अनुमान, जो 20 राज्यों और 557 जिलों को कवर करता है। ये महिलाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग और फाइनेंशियल सपोर्ट की योजनाएं चला रही हैं। लेकिन क्या ये काफी है, जब लिंग भेदभाव अभी भी खेतों में घूमता है?
ग्रीन एनर्जी में छलांग: 259 GW क्षमता, सूरज-हवा से रोशन भारत
नवीकरणीय ऊर्जा पर राज्यसभा में राज्य मंत्री श्रीपद येस्सो नायक ने अच्छी खबर सुनाई। 31 अक्टूबर तक 259.42 गीगावॉट गैर-फॉसिल पावर कैपेसिटी सोलर 129.92 GW, विंड 53.60 GW, बायोमास 11.61 GW, हाइड्रो 55.51 GW, न्यूक्लियर 8.78 GW। नायक ने कहा, ये क्लाइमेट चेंज से लड़ने का हथियार है। लेकिन विपक्ष का तंज: कोयले पर निर्भरता कब खत्म होगी?
कफ सिरप का काला सच: बच्चों की मौतें, 46% जहरीला केमिकल मिला
सदन में सबसे ज्यादा शोर इस मुद्दे पर। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लिखित जवाब में बताया कि मप्र के छिंदवाड़ा और नागपुर में बच्चों की मौत का विलेन ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप (बैच SR-13)। टेस्ट में 46.28% डायथिलीन ग्लाइकोल घातक लेवल। 19 सैंपल्स में 4 फेल। केंद्र ने एक्सपर्ट टीम भेजी, लेकिन सवाल उठा: दवा रेगुलेशन सिस्टम कब सुधरेगा?
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स्वास्थ्य बजट पर केंद्र का फरमान: 8% GDP खर्चो, वरना…
क्लाइमेक्स ये रहा। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यों को ललकारा कि अपना बजट का कम से कम 8% स्वास्थ्य पर लगाओ। सरकारी हेल्थ स्पेंडिंग जीडीपी का 1.35% (2019-20) से 1.84% (2021-22) हो गया। मिनिस्ट्री का बजट 2017-18 के 47,353 करोड़ से 2025-26 में 95,957 करोड़ तक पहुंचा। जाधव ने कहा, ये निवेश से ही हेल्थकेयर मजबूत होगा। लेकिन क्या राज्यों के पास इतना फंडिंग का दम?



