बाल विवाह कुप्रथा हो खत्म, शुरू हुआ 100 दिवसीय अभियान

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बाल विवाह मुक्त भारत के लिए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसका आयोजन किया जाएगा।

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नई दिल्ली: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कल से देशभर में 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत 4 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होगी। यह आयोजन बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जिसे 27 नवंबर 2024 को शुरू किया गया था।

समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर मौजूद रहेंगी। इस अवसर पर बाल विवाह उन्मूलन के प्रति राष्ट्रीय संकल्प लिया जाएगा और देशभर में बदलाव ला रहे लोगों की प्रेरक कहानियों पर आधारित एक विशेष फिल्म भी प्रदर्शित की जाएगी। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।

मार्च 2026 तक चलेगा यह अभियान

अभियान 27 नवंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक चलेगा और इसे तीन चरणों में लागू किया जाएगा।

  • 27 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक के पहले चरण में स्कूलों, कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिताएं, संवादात्मक सत्र और संकल्प समारोह शामिल होंगे।
  • 1–31 जनवरी 2026 तक आयोजित दूसरे चरण में धार्मिक नेताओं, समुदाय के प्रभावशाली लोगों और विवाह सेवा प्रदाताओं को शामिल कर बाल अधिकारों व सुरक्षा के संदेशों को और व्यापक बनाया जाएगा।
  • जबकि तीसरे चरण (1 फरवरी–8 मार्च 2026) में ग्राम पंचायतों और नगरपालिका वार्डों को अपने क्षेत्र को बाल विवाह मुक्त घोषित करने के प्रस्ताव पारित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

कई मंत्रालय के समन्वय से होगा यह कार्यक्रम

इस राष्ट्रीय अभियान को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास और शिक्षा मंत्रालयों के सहयोग से देश के हर कोने तक पहुंचाया जाएगा। मंत्रालय ने नागरिकों, संस्थाओं और समुदाय के नेताओं से आह्वान किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

बाल विवाह पर क्या कहता है NCRB डाटा

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार भारत में बाल विवाह के मामलों में 2023 में छह गुना वृद्धि हुई है। असम में अकेले ही लगभग 90% मामले दर्ज किए गए हैं। 2023 में 6038 मामले दर्ज किए गए जबकि 2022 में 1002 मामले थे। असम में सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले दर्ज हुए हैं जिसके बाद तमिलनाडु कर्नाटक और बंगाल हैं।

एनसीआरबी के अनुसार, साल 2023 में 16,737 लड़कियों और, 129 लड़कों को जबरन शादी के लिए अगवा किया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2023 में इस अधिनियम के तहत 6,038 मामले दर्ज किए गए, जो कि 2022 में 1,002 मामलों और 2021 में 1,050 मामलों की तुलना में काफी अधिक हैं।

बाल विवाह पर क्या कहता है भारतीय कानून?

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006, PCMA) के अनुसार, निम्न आयु से पहले की शादी को बाल विवाह माना जाता है — लड़कियों की न्यूनतम विवाह-आयु 18 साल और लड़कों की 21 साल।

इस कानून के तहत यदि कोई वयस्क पुरुष (उम्र 18 साल से अधिक) नाबालिग (बाल विवाह-योग्य आयु से कम) लड़की या लड़के से विवाह करता है, तो उसे दो साल तक की कड़ी जेल या एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
शादी कराने वाले, उसे संपन्न कराने में मदद करने वाले जैसे पंडित जी, परिवारजन, विवाह आयोजक आदि भी इसी दंड के दायरे में आते हैं।

Kuldeep Dwivedi

kuldeepd999@gmail.com

NewG India का अनुभवी चेहरा, 2017 में RGPV से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। सिविल सर्विसेज कोच और लेखक के तौर पर शिक्षाकुल, एग्जामपुर, कॉसमॉस पब्लिकेशन जैसे अनेक संस्थानों में काम करने का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में NewG India में एंकर एवं रिसर्च स्कॉलर के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

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