नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी की सड़क व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने मार्च 2026 तक कुल 400 किलोमीटर से अधिक सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए केंद्रीय सड़क निधि (CRF) और राज्य सरकार के फंड का संयुक्त उपयोग किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी मिशन का नेतृत्व लोक निर्माण विभाग (PWD) कर रहा है, जो बेहतर इंजीनियरिंग मानकों, कम ट्रैफिक जाम और पूरी तरह जवाबदेही आधारित प्रणाली पर जोर दे रहा है।
दिल्ली को विश्वस्तरीय सड़कें मिलनी चाहिए- मंत्री
इस योजना में कुल 402 किलोमीटर सड़कें शामिल हैं, जिनमें 300.917 किमी CRF और 100.944 किमी राज्य फंड के अंतर्गत आती हैं। यह डुअल-फंडिंग मॉडल उन प्रमुख मार्गों के विकास को गति देगा, जिन पर रोजाना लाखों लोग आवाजाही करते हैं। PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि दिल्ली को ईमानदार, तेज और जीरो-टॉलरेंस वाले मॉडल पर आधारित विश्वस्तरीय सड़कें मिलनी चाहिए। उनके अनुसार यह सिर्फ सड़क निर्माण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजधानी की गतिशीलता के नए मानकों की स्थापना है।
CRF परियोजनाओं के कई टेंडर जारी
CRF के तहत उन सड़कों को प्राथमिकता दी गई है, जिन पर भारी ट्रैफिक दबाव रहता है और जिनका दिल्ली-NCR के बीच आवागमन में बड़ा योगदान है। इनमें वजीराबाद ईस्टर्न एप्रोच रोड, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली की रोड नंबर 68, ओल्ड जीटी रोड, लोनी बॉर्डर रोड नंबर 59, नरेला-अलीपुर रोड, भजनपुरा-यमुना विहार मुख्य सड़क, सीलमपुर-शास्त्री पार्क कॉरिडोर और करावल नगर रोड जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं। कई CRF परियोजनाओं के टेंडर जारी हो चुके हैं और इन्हें फरवरी मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
मार्गों के उन्नयन से नागरिकों को मिलेगा नया अनुभव
राज्य फंड के तहत उन सड़कों को विकसित किया जा रहा है, जो कॉलोनियों, बाजारों और संस्थागत इलाकों की प्रमुख कनेक्टिविटी का हिस्सा हैं। इनमें सीआर पार्क की सड़कें, काली मंदिर रोड, सूरजकुंड रोड, प्रेस एन्क्लेव रोड, शेख सराय–पंचशील रोड, खेल गांव मार्ग, मंदिर मार्ग, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी लिंक रोड और राजोकरी-NH48 सर्विस लेन जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों के उन्नयन से नागरिकों को तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।
मंत्री वर्मा ने कहा कि हर परियोजना की समयसीमा को सख्ती से पालन करने के लिए फील्ड स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और कार्य में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनका कहना है कि “400 किमी मिशन, भरोसे का मिशन है, न देरी होगी, न बहाना चलेगा और न ही गुणवत्ता में कमी स्वीकार की जाएगी। मार्च 2026 से पहले दिल्ली अपने परिवहन ढांचे में साफ परिवर्तन देखेगी।”
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PWD ने निष्पादन को सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए कई नवीन कदम लागू किए हैं, जिनमें रियल-टाइम फील्ड मॉनिटरिंग टीमें, जोन-वार प्रोग्रेस ट्रैकिंग सिस्टम, नई PWD स्पेसिफिकेशन्स का अनिवार्य पालन, ड्रेनेज एवं फुटपाथ के एकीकृत उन्नयन और तेज टेंडरिंग प्रक्रिया शामिल है। इस मॉडल से खासकर मानसून में जलभराव की समस्या कम होगी और सड़कों की मजबूती लंबे समय तक बरकरार रहेगी।
सरकार का यह 400 किमी सड़क पुनर्विकास मिशन न केवल दिल्ली के यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि शहर को आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। कई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है और विभाग इस बात को लेकर आश्वस्त है कि मार्च 2026 की समयसीमा पूरी की जाएगी। मंत्री वर्मा ने कहा, “हम सिर्फ सड़कें नहीं बना रहे, हम हर नागरिक के लिए विश्वास, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।”



