‘गायरोमॉर्फ्स’: बिजली नहीं, अब रोशनी से चलेगा कंप्यूटर

यह खोज फोटोनिक कंप्यूटिंग को हकीकत की जमीन पर उतार सकती है, जहां डेटा फोटॉन्स (प्रकाश कणों) से ट्रांसफर होगा।

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नई दिल्ली। कल्पना कीजिए, एक ऐसा कंप्यूटर जो बिजली की बजाय रोशनी की स्पीड पर दौड़ता हो तेज, हल्का और बिजली का बिल भी न आए। आज की डिजिटल दुनिया में सिलिकॉन चिप्स की सीमाएं साफ दिख रही हैं, लेकिन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) के दिमागी वैज्ञानिकों ने इसे बदलने का रास्ता खोज लिया है। उन्होंने ‘गायरोमॉर्फ्स’ नाम की एक अनोखी सामग्री ईजाद की है, जो रोशनी के सिग्नल्स को चिप के अंदर बिना रुके, बिना कमजोर हुए घुमाने-फिराने में माहिर है। यह खोज फोटोनिक कंप्यूटिंग को हकीकत की जमीन पर उतार सकती है, जहां डेटा फोटॉन्स (प्रकाश कणों) से ट्रांसफर होगा। क्या यह सुपरकंप्यूटर्स का भविष्य है? चलिए, इस ब्रेकथ्रू की परतें खोलते हैं।

रोशनी का जादू: क्यों फोटोनिक्स ही अगला स्टॉप?

पारंपरिक कंप्यूटर्स इलेक्ट्रॉन्स पर चलते हैं, जो गर्मी पैदा करते हैं और स्पीड की दीवार पर ठहर जाते हैं। लेकिन फोटोनिक सिस्टम? वे रोशनी यूज करते हैं कि बिना गर्मी के, बिना एनर्जी वेस्ट के। NYU की टीम के मुताबिक, गायरोमॉर्फ्स इस तकनीक की सबसे बड़ी रुकावट को हल करती है: चिप के अंदर रोशनी को हर दिशा से कंट्रोल करना। वैज्ञानिक इसे ‘आइसोट्रोपिक बैंडगैप’ कहते हैं, यानी ऐसी दीवार जो अनचाही रोशनी को हर कोण से ब्लॉक कर दे, ताकि सही सिग्नल साफ-सुथरा पहुंचे। यह सामग्री कोई साधारण चीज नहीं। यह तरल की तरह फ्लोइड है, लेकिन दूर से देखें तो क्रिस्टल जैसी परफेक्ट पैटर्न वाली। NYU के लीड रिसर्चर सेबेस्टियनो मार्टिनियानी की टीम ने इसे ‘हाइब्रिड वंडर’ बताया। यह ऑर्डर और डिसऑर्डर का परफेक्ट ब्लेंड है, उन्होंने फिजिकल रिव्यू लेटर्स जर्नल में लिखे पेपर में कहा। नतीजा? रोशनी का सिग्नल लॉस 50% तक कम मतलब फास्टर प्रोसेसिंग, लोअर पावर यूज।

पुरानी कोशिशों से एक कदम आगे: क्वासीक्रिस्टल्स को पीछे छोड़ा

1980 के दशक में पॉल स्टीनहार्ड और डोव लेवाइन ने क्वासीक्रिस्टल्स की खोज की थी बिना रेगुलर पैटर्न के, लेकिन मैथमैटिकल ऑर्डर वाली स्ट्रक्चर्स। ये रोशनी ब्लॉक करने में अच्छी थीं, लेकिन आधी-अधूरी: या तो सिर्फ कुछ एंगल्स पर काम करतीं, या सभी पर लेकिन कमजोर। गायरोमॉर्फ्स ने इसे पलट दिया। टीम ने मेटामटीरियल्स यूज किए ऐसी आर्टिफिशियल स्ट्रक्चर्स जहां प्रॉपर्टीज केमिस्ट्री से नहीं, डिजाइन से आती हैं। उन्होंने एक स्मार्ट एल्गोरिदम बनाया, जो ‘कोरिलेटेड डिसऑर्डर’ पर काम करता है। सरल शब्दों में जैसे जंगल में पेड़ नजदीक न लगें, लेकिन दूर से पैटर्न दिखे। इससे सामग्री हर दिशा से रोशनी को पूरी तरह रोकती है, बिना किसी गैप के। यह कोई पुरानी स्ट्रक्चर नहीं, बल्कि नया क्लास है, मार्टिनियानी ने कहा।

भविष्य की तस्वीर: तेज कंप्यूटर्स, ग्रीन टेक

गायरोमॉर्फ्स सिर्फ थ्योरी नहीं, प्रैक्टिकल गेम-चेंजर हैं। फोटोनिक चिप्स में ये सिग्नल्स को लंबी दूरी तक बिना नुकसान पहुंचाएंगी। कल्पना करें कि AI मॉडल्स जो सेकंड्स में ट्रेन हों, डेटा सेंटर्स जो बिजली बचाएं, या क्वांटम कंप्यूटिंग का ब्रिज। एनर्जी एफिशिएंसी 10 गुना बढ़ सकती है, क्लाइमेट चेंज के दौर में ये गोल्डन है। लेकिन चुनौतियां बाकी है। स्केल-अप और मैन्युफैक्चरिंग। NYU की टीम अब इसे रीयल चिप्स में टेस्ट करने पर फोकस्ड है। यह खोज नवंबर 2025 में पब्लिश हुई, और पहले ही साइंस कम्युनिटी में हलचल मचा रही है। क्या गायरोमॉर्फ्स सिलिकॉन को साइडलाइन कर देंगी?

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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