नई दिल्ली। पेट्रोलियम उद्योग में काम करने वाले लाखों श्रमिकों और कंपनियों के लिए सरकार की नई श्रम संहिताएं बड़ा बदलाव लेकर आई हैं। सरकार ने चार श्रम संहिताओं व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और वेतन संहिता 2019 को लागू कर एक नया, आधुनिक और एकीकृत श्रम ढांचा तैयार किया है। इन सुधारों का सबसे ज्यादा असर तेल और गैस क्षेत्र पर पड़ेगा, क्योंकि यह उद्योग हमेशा से जोखिम और खतरों से भरा हुआ माना जाता है।
नई संहिताओं के लागू होने से बड़ा बदलाव
नई संहिताओं के लागू होने के बाद पेट्रोलियम उद्योग पुराने, जटिल और बिखरे हुए नियमों से बाहर निकलकर एक ऐसे सिस्टम में प्रवेश करेगा जहां सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और नियमों का पालन पहले से ज्यादा आसान और सुदृढ़ होगा। पेट्रोलियम उद्योग में ज्वलनशील पदार्थों, खतरनाक गैसों और उच्च तापमान पर काम होने के कारण दुर्घटनाओं और बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। पहले इस सेक्टर में सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से कारखाना अधिनियम 1948 पर आधारित थी, जो आज के आधुनिक जोखिमों के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता था। अब नई संहिताओं के साथ सुरक्षा, निरीक्षण, प्रशिक्षण और आपातकालीन तैयारी को पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है।
व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 के तहत अब सभी पेट्रोलियम इकाइयां रिफाइनरी, गैस प्रोसेसिंग यूनिट, ईंधन डिपो, पाइपलाइन और एलएनजी टर्मिनल एक ही राष्ट्रीय सुरक्षा ढाचे के अधीन आ गई हैं। इस संहिता में जोखिम पहचान, खतरनाक काम शुरू करने से पहले सरकारी अनुमति, आधुनिक सुरक्षा मानक, आपातकालीन प्रबंधन और डिजिटल अनुपालन को अनिवार्य किया गया है।
इस कानून में श्रमिकों की सुरक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। अब खतरनाक काम करने वाले हर कर्मचारी की नौकरी से पहले, समय-समय पर और सालाना स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी। इसके अलावा सभी श्रमिकों के लिए क्षमता-आधारित प्रशिक्षण और प्रमाणन जरूरी किया गया है, ताकि वे रसायनों और ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित तरीके से संभाल सकें। नियोक्ताओं को आधुनिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और कर्मचारियों को उनके उपयोग की ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी दी गई है।
नई संहिता में आपातकालीन तैयारी को भी मजबूत किया गया है। अब ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान केवल दस्तावेज भर नहीं रहेगा, बल्कि यह एक क्रियान्वित होने वाला सिस्टम होगा। समय-समय पर मॉक ड्रिल करवाना भी जरूरी होगा, ताकि किसी बड़े हादसे की स्थिति में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई हो सके। श्रमिकों को खतरनाक काम से इनकार करने का अधिकार दिया गया है और गर्भवती महिलाओं व किशोरों की सुरक्षा के लिए विशेष नियम लागू किए गए हैं।
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सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के लागू होने से पेट्रोलियम उद्योग के कर्मचारियों को पहले से कहीं अधिक कल्याणकारी लाभ मिलेंगे। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) का कवरेज अब अधिक जगहों तक विस्तारित होगा, जिससे श्रमिकों को चिकित्सा सुविधाएं, दुर्घटना मुआवजा, मातृत्व लाभ और विकलांगता सहायता आसानी से मिल सकेगी। इसके अलावा डिजिटल सोशल सिक्योरिटी रिकॉर्ड सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभ पाने की प्रक्रिया तेज होगी। इन दोनों संहिताओं के लागू होने से पेट्रोलियम उद्योग में सुरक्षा मानकों, श्रमिक कल्याण, आपातकालीन तैयारी, निरीक्षण व्यवस्था और कुल मिलाकर संचालन में बड़ा सुधार होगा। इससे उद्योग में उत्पादकता बढ़ेगी, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और कर्मचारियों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह देश के पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक सुधार है, जो इस उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर ले जाने में मदद करेगा। नई संहिताएं पूरे सेक्टर में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करेंगी और भारत के ऊर्जा उद्योग को अधिक विश्वसनीय, सक्षम और आधुनिक बनाएंगी।



