नक्सली बालकृष्ण को इसी साल मिली जिम्मेदारी, इनाम 1.50 करोड़ का, ढेर

गरियाबंद की मुठभेड़ में 5. 22 करोड़ के इनामी दस माओवादी मारे गए हैं। बालकृष्ण संगठन विस्तार देने गरियाबंद आया था। वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र नाथ राय की रिपोर्ट।

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छत्तीसगढ़: गरियाबंद में 11 सितंबर की रात मुठभेड़ में 10 उच्च पदस्थ माओवादियों को जवानों ने मार गिराया। ढेर माओवादियों पर कुल 5.22 करोड़ रुपये का इनाम था। इसमें माओवादियों के सेंट्रल कमेटी का सदस्य बालकृष्ण ऊर्फ मनोज ऊर्फ भास्कर भी शामिल है। अकेले यही 1.50 करोड़ रुपये का इनामी था। एक करोड़ छत्तीसगढ़ सरकार से और 25-25 लाख रुपये उड़ीसा व आंध्र प्रदेश सरकार से।

आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि बालकृष्ण को नक्सलियों के टाप कमांडर चलपति के एनकाउंटर के बाद 14 जनवरी को संगठन के विस्तार का नया काम सौंपा गया था। इसी सिलसिले में वह गरियाबंद आया हुआ था। सेंट्रल कमेटी के सदस्य जहां भी जाते हैं, उनके साथ हर वक्त माओवादियों की एक कंपनी सुरक्षा में रहती है। यही वजह रही कि जो भी माओवादी मारे गये, उनमें से ज्यादातर उच्च इनामी और टाप के माओवादी लीडर थे। मृत माओवादियों में प्रमुख प्रमोद उर्फ पंडरन्ना (उड़ीसा राज्य कमेटी सदस्य), विमल उर्फ जाडी वेंकस (ओडिशा राज्य कमेटी सदस्य) शामिल हैं। मुठभेड़ में ग्रेडेड हथियारों सहित कुल दस हथियार और अन्य सामग्री बरामद हुई।

पुलिस काे चार सितंबर से मिल रही थी इनकी लोकेशन 

सूत्रों के अनुसार, गरियाबंद में माओवादियों के उच्च स्तरीय सदस्यों के आने और हर वक्त के बदलते लोकेशन की सूचना चार सितंबर से ही पुलिस को मिल रही थी। इसके बाद रणनीति बनाकर पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देशन में 10 सितंबर को अभियान शुरू किया गया। 11 को मुठभेड़ शुरू हुई, जो देर रात तक चलती रही। फोर्स को मैनपुर के राजाडेरा मटाल पहाड़ी के क्षेत्र में ओडिशा स्टेट कमेटी के नक्सली मौजूद होने की सूचना मिली थी। आपरेशन में गरियाबंद पुलिस की ई-30, एसटीएफ, सीएएफ और कोबरा 207 की संयुक्त पार्टी इस नक्सल विरोधी अभियान में शामिल किया गया था।

11 को शुरू हुई मुठभेड़ 12 तक चली

राजाडेरा मटाल पहाड़ी पर पुलिस की संयुक्त टीम धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। इसी बीच नक्सलियों को भी उनके आने की सूचना मिल गयी, लेकिन समय कम होने के कारण वे एंबुस नहीं बना पाये और सुरक्षा बल उन पर हावी हो गये। जैसे ही नक्सलियों ने हमला किया, सुरक्षा बलों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।  11 सितंबर से शुरु हुई मुठभेड़ 12 सितंबर की सुबह 8 बजे तक तक चलती रही। सूत्रों के अनुसार, इसमें कुछ माओवादी भागने में भी कामयाब हुए, लेकिन जितने भी माओवादी मारे गये और उनकी पहचान हुई तो उनमें अधिकांश उच्च पदस्थ माओवादी हैं, जिनकी तलाश पुलिस को बहुत दिनों से थी।

जानकार बताते हैं कि हर मुठभेड़ के बाद पुलिस सर्चिंग अभियान चलाकर शवों को इकट्‌ठा करने और उनकी पहचान करने का काम करती है। इसमें माओवादी मारे गये अपने साथियों के शव को लेकर भागने का भी काम करते हैं, जिससे मुठभेड़ में मारे जाने की संख्या कम दिखाया जा सके। इस बार सर्चिंग अभियान में पुलिस ने छह पुरूष और चार महिला नक्सलियों के शव बरामद किये। मुठभेड़ में एके-47, इंसास, एसएलआर जैसे आटोमेटिक हथियार सहित कुल दस हथियार और भारी मात्रा में नक्सल सामग्री बरामद की गई है।

काफी कठिन था यह आपरेशन

भालू डिग्गी के क्षेत्र में हुआ यह आपरेशन काफी कठिन था। मानसूनी बारिश ने जवानों के लिए राह और भी कठिन थी, लेकिन जवानों के हौसले ने कामयाबी दिलाई। कुछ समय पूर्व नक्सलियों को भी पुलिस के आने की सूचना मिल जाने के कारण अपने पुराने अंदाज गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनायी, लेकिन जवानों की सजगता से वह नाकाम रहे। इस मारे गये नक्सलियों में सात बड़े कैडर के हैं। बालकृष्ण पर 18 मुकदमें दर्ज हैं।

एडीजी ने कहा

एडीजी नक्सल आपरेशन विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि नक्सली यहां नया इलाका बनाना चाह रहे थे, जिसे फोर्स ने खत्म कर दिया। इससे फोर्स का मनोबल बढ़ेगा। आने वाले समय में बस्तर संभाग से जल्द ही नक्सलियों का सफाया हो जाएगा।

मुठभेड़ में मृत माओवादियों का ब्योरा।

किस पर कितना था इनाम

मारे गये माओवादियों में वारंगल के रहने वाले मनोज ऊर्फ बालकृष्ण पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक करोड़ रुपये का इनाम था। वही उड़ीसा में 25 लाख, आंध्रप्रदेश सरकार द्वारा 25 लाख का इनाम घोषित था। वहीं, आंध्र प्रदेश के ओडिसा राज्य कमेटी के सदस्य प्रमोद उर्फ पांडू पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख व उड़ीसा व आंध्र प्रदेश में 20-20 लाख रुपये का इनाम था।

आदिलाबाद तेलंगाना के रहने वाले विमल उर्फ मंगन्ना उर्फ सुरेश पर छत्तीसगढ़ में आठ लाख व उडीसा व आंध्र प्रदेश में पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था। सुकमा जिले की रहने वाली विक्रम उर्फ मंजू पर छत्तीसगढ़ में पांच लाख व उड़ीसा व आंध्र प्रदेश में चार-चार लाख का इनाम था। नारायणपुर के उमेश पर छत्तीसगढ़ में पांच लाख व उड़ीसा और आंध्र में चार-चार लाख का इनाम था।

ऐसे ही कांकेर की रजीता, अंजली व सिंधु पर छतीसगढ़ में पांच-पांच लाख व उड़ीसा और आंध्र में चार-चार लाख रुपये का इनाम था। वहीं, कांकेर के ही आरती व समीर पर तीन प्रदेशों में एक-एक लाख रुपये के इनाम थे। इसके अतिरिक्त कुछ इनाम केंद्र सरकार द्वारा भी घोषित थे।

आईजी ने कहा

रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि मैनपुर के भालूडिग्गी की पहाड़ियों पर यह नक्सल ऑपरेशन चला। रात भर रुक रुक पर फायरिंग होती रही। गरियाबंद में भालूडिग्गी का पहाड़ समुंद्र तल से 1500 फीट ऊपर है। यहां पर भौगोलिक स्थिति काफी भयावह है। इस कठिन परिस्थिति में सुरक्षाबलों के जवानों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।

कौन था बालकृष्ण

मॉडेम बालकृष्ण का जन्म तेलंगाना के वारंगल में हुआ था। वारंगल जिले में जन्मे मनोज ने 1981 से 1983 तक हैदराबाद के मलकपेट जूनियर कॉलेज में इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की। 1980 के दशक में नक्सल संगठन से जुड़े: आंदोलन के प्रमुख कमांडरों में से एक माने जाने वाले मनोज उर्फ मॉडेम बालकृष्ण, जिन्हें बलन्ना, रामचंदर और भास्कर के नाम से भी जाना जाता है, 1980 के दशक में इसमें शामिल हुआ था।

साल 1983 में, वरिष्ठ माओवादी कमांडर, संबमूर्ति और संतोष रेड्डी द्वारा सिखाए गए क्रांतिकारी छात्र संघ के दर्शन से प्रभावित होकर, सरकार विरोधी गतिविधियों को संगठित करने के लिए भद्राचलम के जंगलों में चला गया। पहली वहीं 1984 में गिरफ्तार भी हुआ।

1990 में हुई बालकृष्ण की रिहाई: 1987 में महबूबनगर पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया, लेकिन जनवरी 1990 में अपहृत तेदेपा विधायक वेंकटेश्वर राव के बदले उन्हें रिहा कर दिया गया। 15 फरवरी, 2008 को ओडिशा के नयागढ़ शहर पर हुए एक हमले में नक्सलियों ने 13 पुलिस अधिकारियों सहित 14 लोगों की हत्या कर दी। उस हमले का योजनाकार बालकृष्ण ही था। 

ओडिशा की राज्य समिति का भी रहा सदस्य

दस साल से ज्यादा समय तक ओडिशा राज्य समिति के सचिव के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, वह आंध्र ओडिशा बार्डर स्पेशल जोनल कमेटी में भी सक्रिय रहा, जो 2000 के दशक की शुरुआत से ही बड़े नक्सली हमलों की जिम्मेदार रही है। नयागढ़ हमले के चार महीने बाद 29 जून, 2008 को बालीमेला जलाशय नाव हमले के आयोजन और उसे अंजाम देने में उसकी अहम भूमिका थी, जिसके परिणामस्वरूप जलमार्गों पर अपनी तरह के पहले घात लगाकर किए गए हमले में आंध्र प्रदेश पुलिस के 37 ग्रेहाउंड कमांडो मारे गए थे। 14 जनवरी को नक्सलियों के टॉप कमांडर चलपति के एनकाउंटर के बाद मोड़ेम बालकृष्ण को नई जिम्मेदारी दी गई थी। उसका काम संगठन विस्तार का था। 

इस साल छत्तीसगढ़ में मारे गये 241 माओवादी

पुलिस के मुताबिक्र, इस मुठभेड़ के साथ, इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 241 नक्सली मारे गए हैं। इनमें से 212 सात जिले वाले बस्तर संभाग में मारे गए हैं, जबकि 27 रायपुर संभाग के गरियाबंद जिले में मारे गए। दुर्ग संभाग के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में दो अन्य नक्सली मारे गए। गरियाबंद जिले में मारे गए नक्सलियों में माओवादियों की केंद्रीय समिति और उड़ीसा राज्य समिति का सदस्य चलपथी उर्फ जयराम भी शामिल था।

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