पटना: बिहार की चुनावी सरगर्मी के बीच लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार एक बार फिर मुश्किलों में घिर गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में लालू, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को 13 अक्टूबर तक पेश होने का आदेश दिया है। सीबीआई ने इस मामले में सिर्फ लालू और उनके बेटे पर ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियों मीसा भारती, निशा भारती और हेमा यादव पर भी आरोप लगाए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस केस को लेकर मीसा भारती के इर्द-गिर्द है।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?
सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब उन्होंने जमीन के बदले नौकरी देने का घोटाला किया। इस दौरान लालू परिवार ने 1 लाख वर्गफुट से अधिक जमीन मात्र 26 लाख रुपये में हासिल कर ली। अधिकतर जमीनें गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर की गईं। रेलवे में नौकरियां मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर जोन में दी गईं। जमीन मालिकों का दावा है कि उन्हें लालू परिवार से नकद भुगतान किया गया था। सीबीआई का कहना है कि उस समय जमीन का मार्केट रेट सर्किल रेट से 4-6 गुना ज्यादा था, लेकिन रजिस्ट्री सर्किल रेट पर कराई गई।
किन पर है आरोप?
लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव तत्कालीन रेल मंत्री के रूप में मुख्य आरोपी हैं। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का नाम भी केस में शामिल है। इसके साथ ही लालू प्रसाद यादव की तीनों बेटियों (मीसा भारती, निशा भारती और हेमा यादव) के नाम भी इस केस में सीधे तौर पर शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने अभी तक बेटियों को लेकर कोई सीधा आदेश जारी नहीं किया है।
यह भी पढें:- बिहार चुनाव में कार्यकर्ताओं की रायशुमारी से तय होगी रणनीति
चुनावी साल में असर?
बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे इस मामले ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में बड़ा सवाल यह है कि क्या लैंड फॉर जॉब केस का असर लालू परिवार और महागठबंधन की चुनावी रणनीति पर पड़ेगा?



