नयी दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बल केवल देश की सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में भी अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्रीय और वैशिक स्तर पर भरोसेमंद प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में स्थापित हो चुके हैं। प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, युद्ध और मानवीय संकट की हर घड़ी में थल सेना, नौसेना, वायु सेना और तटरक्षक बल ने त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई कर लाखों जीवन बचाए हैं।
2004 की सुनामी: निर्णायक मोड़
वर्ष 2004 की हिंद महासागर सुनामी भारत के आपदा प्रबंधन ढांचे के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई। इस आपदा ने त्रि-सेवा समन्वय की आवश्यकता को स्पष्ट किया। सेना, नौसेना, वायु सेना और तटरक्षक बल ने भूमि, समुद्र और आकाश—तीनों मोर्चों पर व्यापक राहत व बचाव अभियान चलाया।
करीब 20,900 कर्मियों, 40 जहाजों, 34 विमानों और 42 हेलीकॉप्टरों की तैनाती के साथ लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इस अभियान ने भविष्य के एचएडीआर अभियानों की नींव मजबूत की।
कोविड-19 के दौरान ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’
कोविड-19 महामारी के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु के तहत 55 दिनों में 3,992 भारतीय नागरिकों को समुद्री मार्ग से स्वदेश लाया गया। भारतीय नौसेना के जहाजों ने 23,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर विदेशों में फंसे नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।
2025: त्वरित कार्रवाई और प्रभावी परिणाम
वर्ष 2025 में भारतीय थल सेना ने दस राज्यों के 80 से अधिक स्थानों पर 141 टुकड़ियां तैनात कीं।
- 28,293 नागरिकों को बचाया गया
- 7,318 लोगों को चिकित्सा सहायता दी गई
- 2,617 लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई
ऑपरेशन ब्रह्मा (म्यांमार, 2025)
भूकंप प्रभावित म्यांमार में भारत ने लगभग 750 मीट्रिक टन राहत सामग्री भेजी। 200 बिस्तरों वाले फील्ड अस्पताल में 2,500 से अधिक लोगों का इलाज किया गया। छह विमानों और पांच नौसैनिक जहाजों के जरिए सहायता पहुंचाई गई।
ऑपरेशन सागर बंधु (श्रीलंका, 2025)
चक्रवात दितवाह के बाद श्रीलंका में 1,058 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई। 2,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया और 264 जीवित बचे लोगों को वायु सेना ने एयरलिफ्ट किया। भारतीय सेना ने बेली ब्रिज स्थापित कर संपर्क बहाल किया।
संस्थागत ढांचा: सुदृढ़ नीति और समन्वय
भारत की एचएडीआर नीति एक मजबूत संस्थागत ढांचे पर आधारित है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) नीति निर्धारण और समन्वय करता है।
- गृह मंत्रालय नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है।
- विदेश मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय समन्वय संभालता है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) विशेष बचाव अभियानों में तैनात रहता है।
- रक्षा मंत्रालय के अधीन एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय रणनीतिक परिवहन, रसद, चिकित्सा और इंजीनियरिंग सहायता प्रदान करता है।
यह ढांचा ‘शीघ्र, कुशल और समन्वित’ प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है।
घरेलू अभियानों में अद्वितीय योगदान
उत्तराखंड (2013), जम्मू-कश्मीर (2014), केरल (2018), चक्रवात फानी (2019), अम्फन (2020), सिक्किम हिमनदी झील विस्फोट (2023) और देशव्यापी बाढ़ राहत अभियानों में सशस्त्र बलों ने बड़े पैमाने पर बचाव, राहत और पुनर्वास कार्य किए।
2024 में 14 राज्यों में 83 टुकड़ियों की तैनाती से 29,972 नागरिकों को बचाया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय साझेदार
भारत ने नेपाल (ऑपरेशन मैत्री, 2015), अफगानिस्तान (ऑपरेशन देवी शक्ति, 2021), यूक्रेन (ऑपरेशन गंगा, 2022), तुर्किये-सीरिया (ऑपरेशन दोस्त, 2023), सूडान (ऑपरेशन कावेरी, 2023) सहित अनेक देशों में समय पर सहायता पहुंचाई।
प्रधानमंत्री के ‘सागर’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और विश्वसनीय प्रथम प्रतिक्रिया राष्ट्र के रूप में उभरा है।
तैयारियां और संयुक्त अभ्यास
‘अभ्यास समन्वय’, ‘अभ्यास चक्रवात’, ‘संयुक्त विमोचन 2024’ और ‘टाइगर ट्रायम्फ 2025’ जैसे बहु-एजेंसी अभ्यासों के माध्यम से भारत अपनी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। इन अभ्यासों से अंतर-संचालन क्षमता, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूती मिलती है।
निष्कर्ष
मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान भारत की रणनीतिक दृष्टि और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण हैं। भारतीय सशस्त्र बल संकट की हर घड़ी में न केवल देशवासियों, बल्कि मित्र राष्ट्रों के साथ भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।
‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से प्रेरित ये प्रयास भारत को एक जिम्मेदार, संवेदनशील और विश्वसनीय वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।



