नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक का अत्याधुनिक जहाज आईसीजीएस विग्रह इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 2 दिसंबर से 5 दिसंबर 2025 तक रहेगा। दोनों देशों के तटरक्षक कर्मी मिलकर टेबल-टॉप अभ्यास, जहाज पर ड्रिल, संयुक्त ट्रेनिंग और समुद्र में पासेक्स कर रहे हैं। इसका मकसद एक-दूसरे की भाषा, कम्युनिकेशन और तरीके को इतना बेहतर करना कि जरूरत पड़ने पर दोनों देश एक साथ तुरंत कार्रवाई कर सकें।
अवैध मछली पकड़ने से लेकर तेल रिसाव तक, हर चुनौती पर एक साथ
अभ्यास में मुख्य ध्यान इन मुद्दों पर है कि अवैध मछली पकड़ना (आईयूयू फिशिंग) रोकना, समुद्री डकैती और तस्करी पर लगाम, जहाज दुर्घटना में सर्च एंड रेस्क्यू, समुद्र में तेल या केमिकल रिसाव रोकना और दोनों देशों के बीच हजारों किलोमीटर समुद्री सीमा और व्यस्त शिपिंग लेन हैं, इसलिए एक-दूसरे की तुरंत मदद जरूरी है।
दोस्ती सिर्फ कागज पर नहीं, मैदान में भी
2020 में दोनों देशों ने तटरक्षक सहयोग का समझौता किया था। उसके बाद से लगातार उच्च-स्तरीय विज़िट, ट्रेनिंग प्रोग्राम और समुद्री गश्त हो रही हैं। इंडोनेशिया के अफसर भारत आकर ट्रेनिंग लेते हैं, भारतीय जहाज इंडोनेशिया के बंदरगाहों पर जाते हैं। इस बार भी शिष्टाचार मुलाकातें, जहाज का दौरा, योग सेशन और खेलकूद भी हो रहे हैं, ताकि सैनिकों के बीच दोस्ती और गहरी हो।
हिंद-प्रशांत में शांति का मजबूत संदेश
भारत और इंडोनेशिया दोनों बड़े समुद्री लोकतंत्र हैं। दोनों चाहते हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियमों का पालन हो, कोई दादागीरी न चले। तटरक्षक-से-तटरक्षक सहयोग इसी का ज़मीनी रूप है। जकार्ता दौरा खत्म होने के बाद ‘विग्रह’ मलेशिया के पोर्ट क्लैंग जाएगा और फिर आसियान के बाकी देशों में भी यही मैसेज ले जाएगा।
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भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का प्रतीक
आईसीजीएस विग्रह खुद भारत में बना हुआ ऑफशोर पेट्रोल वेसल है। यह जहाज न सिर्फ लंबी दूरी तक जा सकता है, बल्कि हेलिकॉप्टर भी ले जा सकता है। इसे भेजकर भारत दिखा रहा है कि वह अपने पड़ोसियों की सुरक्षा में सक्रिय पार्टनर है और क्षेत्र में शांति-स्थिरता के लिए हर कदम उठाने को तैयार है। तीन दिन का यह छोटा-सा दौरा दरअसल दो बड़े समुद्री देशों के बीच विश्वास की एक और मजबूत कड़ी है। समुद्र में जब दो दोस्त एक साथ खड़े हों, तो कोई गलत काम करने की हिम्मत नहीं करता।



