दुनिया का सबसे तेज धावक खतरे में, भारत की सफलता से सीखें सबक

वर्ष 2010 में चीता संरक्षण कोष ने इस खास दिन की शुरुआत की थी, ताकि चीतों के सिकुड़ते जंगल और लुप्त होती संख्या पर नजर डाली जाए।

Share This Article:

नई दिल्ली: आज जब दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस मना रहा है, तो सोचिए धरती का सबसे तेज दौड़ने वाला, जो 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है, आज अपने ही अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। वर्ष 2010 में चीता संरक्षण कोष ने इस खास दिन की शुरुआत की थी, ताकि चीतों के सिकुड़ते जंगल और लुप्त होती संख्या पर नजर डाली जाए। लेकिन 15 साल बाद भी सवाल वही है: क्या हम वक्त पर जाग पाएंगे!  आइए, इस दिवस पर चीतों की कहानी को फिर से जीएं, चुनौतियों से लेकर उम्मीदों तक।

स्पीड का राजा, लेकिन संकट का शिकार

चीता (एसिनोनिक्स जुबेटस) सिर्फ गति का प्रतीक नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी का बैलेंस व्हील है। फिर भी, आज ये बड़ी बिल्लियों में सबसे ज्यादा खतरे में घिरा हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जंगलों में मुश्किल से 7,000 चीते बचे हैं। अपना पुराना इलाका खो चुका है, करीब 91 प्रतिशत। अफ्रीका के चुनिंदा संरक्षित इलाकों में बिखरी आबादी बची है, तो ईरान में एशियाई चीते की एक दुर्लभ टुकड़ी। आईयूसीएन की ताजा लाल किताब में इसे ‘संकटग्रस्त’ माना गया है। पिछले 15 सालों में संख्या में 37 प्रतिशत की भारी गिरावट। क्यों? जंगलों की कटाई, इंसानों से टकराव, और शिकार के लिए हिरण-खरगोश जैसी प्रजातियों का अभाव। अगर ये सिलसिला न रुका, तो आने वाले दशक में हालात और बिगड़ सकते हैं। क्या हम इतनी तेजी से दौड़ पाएंगे जितनी चीता?

एक योद्धा की विरासत: विन्सेंट वैन डेर मेरवे की याद

इस दिवस पर एक नाम जो दिल छू जाता है कि विन्सेंट वैन डेर मेरवे। मार्च 2025 में दुनिया ने इस चीता रक्षक को खो दिया। मोंगाबे के संस्थापक रेट बटलर ने उनके लिए भावुक श्रद्धांजलि लिखी, जिसमें मेरवे के संघर्ष को सलाम किया। उन्होंने चीता मेटापॉपुलेशन प्रोजेक्ट लॉन्च किया, जो दक्षिण अफ्रीका में चीतों को नई जिंदगी दे रहा है। समस्या? छोटे-छोटे अभयारण्यों में बंटी आबादी से आनुवंशिक कमजोरी बढ़ रही थी। मेरवे की टीम ने चीतों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया, ताकि नस्ल मजबूत बनी रहे। नतीजा? दक्षिण अफ्रीका इकलौता देश जहां जंगली चीतों की तादाद बढ़ रही है। बटलर कहते हैं कि उनकी रणनीति ने चमत्कार दिखाया। ये कहानी बताती है कि संरक्षण सिर्फ पैसे का खेल नहीं, जुनून का।

भारत की जीत: 70 साल बाद चीतों की दहाड़

भारत के लिए चीता कोई नई कहानी नहीं। 1952 में ये विलुप्त हो चुके थे। लेकिन 2022 में ‘प्रोजेक्ट चीता’ ने इतिहास रचा। नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लाए गए। शुरुआत मुश्किल थी कि कुछ मौतों पर आलोचना हुई, दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों ने इसे ‘गलत कदम’ कहा। लेकिन धैर्य ने रंग दिखाया। आज, दिसंबर 2025 तक यहां 32 चीते हैं और गर्व की बात, 21 शावक भारत की धरती पर ही पैदा हुए। नवंबर में मादा चीता मुखी ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जो प्रोजेक्ट को नई उड़ान दे रहा है। ये न सिर्फ मांसाहारी संरक्षण की मिसाल है, बल्कि साबित करता है कि क्रॉस-बॉर्डर सहयोग से चमत्कार हो सकते हैं। क्या ये मॉडल अफ्रीका-एशिया के लिए ब्लूप्रिंट बनेगा?

चुनौतियां बाकी, रास्ता साफ: क्या करें हम?

चीतों को बचाना आसान नहीं। अफ्रीका-एशिया में ये छोटे-छोटे पैचों में सिमट रहे हैं।

जरूरी कदम:

जुड़े हुए जंगल: सुरक्षित कॉरिडोर बनाएं, ताकि चीते घूम सकें।

समुदायों का साथ: स्थानीय लोगों को फायदा दें, पर्यटन से कमाई, संघर्ष कम।

खाने की गारंटी: शिकार प्रजातियों को बढ़ावा, ताकि चीते भूखे न रहें।

स्मार्ट नीतियां: इंसान-चीता टकराव रोकने के लिए फेंसिंग और जागरूकता।

विज्ञान की ताकत: जीआईएस ट्रैकिंग और जीन पूल बचाओ।

PM मोदी ने प्रोजेक्ट चीता के तीन साल पूरे होने पर दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर दुनिया के सबसे तेज धावक चीता के संरक्षण के लिए समर्पित सभी वन्यजीव प्रेमियों, संरक्षणवादियों और वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई दी। साथ ही उन्होंने सितंबर 2022 में शुरू किए गए महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तीन साल सफलतापूर्वक पूरे होने पर गर्व व्यक्त किया। यह परियोजना भारत में 70 वर्ष बाद विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को पुनः स्थापित करने का ऐतिहासिक प्रयास है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर कहा अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर हमारी पृथ्वी के सबसे अद्भुत जीवों में से एक चीता की सुरक्षा के लिए समर्पित सभी वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणवादियों को मेरी शुभकामनाएं। तीन साल पहले, हमारी सरकार ने इस अद्भुत जानवर की सुरक्षा और उस इकोसिस्टम को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट चीता शुरू किया था जिसमें यह वास्तव में फल-फूल सके। यह खोई हुई पारिस्थितिक विरासत को पुनर्जीवित करने और हमारी जैव विविधता को सुदृढ़ करने का भी एक प्रयास था।

मालूम हो कि प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री के 72वें जन्मदिन पर हुई थी, जब नामीबिया से 8 चीते (5 मादा, 3 नर) विशेष चार्टर्ड कार्गो विमान से ग्वालियर लाए गए और मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया। इसके ठीक एक साल बाद, फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत लाए गए। इस प्रकार कुल 20 संस्थापक चीतों की आबादी से परियोजना शुरू हुई।तीन वर्षों में यह परियोजना कई चुनौतियों के बावजूद उल्लेखनीय सफलता की ओर बढ़ी है। अब तक कुनो में 26 चीता शावक जन्म ले चुके हैं, जिनमें से 17 वर्तमान में जीवित हैं। वयस्क चीतों सहित कुनो नेशनल पार्क में कुल 24-25 चीते मौजूद हैं।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.