नई दिल्ली। देश में खराब मौसम, चक्रवात और भारी बारिश की सटीक भविष्यवाणी करने के लिए भारत सरकार ने मौसम नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार किया है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में जानकारी दी कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के डॉप्लर रडार नेटवर्क की पहुंच अब देश के 92 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र तक हो गई है।
पिछले एक साल की बड़ी उपलब्धियां
मौसम विभाग ने पिछले 12 महीनों में तकनीकी बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है:
नए रडार: रायपुर और मेंगलूरू में दो सी-बैंड रडार तथा असम के जोरहट में एक एक्स-बैंड डॉप्लर रडार स्थापित किया गया है।
ऑटोमैटिक केंद्र: देशभर में 200 नए स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो पल-पल की जानकारी साझा कर रहे हैं।
हिमालय और तटों पर सुरक्षा कवच
पर्वतीय और तटीय क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए विशेष रडार तैनात किए गए हैं:
पश्चिमी हिमालय: लेह, श्रीनगर, जम्मू, कुफरी और मुक्तेश्वर सहित 10 स्थानों पर रडार ‘रियल-टाइम’ डेटा दे रहे हैं।
पूर्वी हिमालय: मोहनबाड़ी, चेरापूंजी, अगरतला और जोरहट में नेटवर्क सक्रिय है।
समुद्री तट: पश्चिमी तट पर 11 (जैसे मुंबई, कोच्चि, गोवा) और पूर्वी तट पर 8 रडार (जैसे चेन्नई, विशाखापट्टणम) तैनात हैं।
‘विंड्स’ प्रोजेक्ट: गांव-गांव तक पहुंचेगी तकनीक
सरकार अब तहसील और ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम की जानकारी जुटाने की योजना पर काम कर रही है:
विंड्स प्रणाली: इसके तहत राज्य सरकारों के सहयोग से हर ब्लॉक/तहसील स्तर पर मौसम केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
वर्षा मापन: ग्राम पंचायत स्तर पर स्वचालित वर्षा मापन यंत्र लगाए जाएंगे, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर बारिश का सटीक डेटा मिल सकेगा।



