नई दिल्ली | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अपना 64वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार मनाएगा। परिसर में आयोजित होने वाले इस समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान करेंगे।
उपाधियों में नारी शक्ति का दबदबा
संस्थान के निदेशक डॉ. सीएच श्रीनिवास राव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इस वर्ष कुल 470 विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपाधियां प्रदान की जाएंगी। इसमें 180 पीएचडी और 290 एम.एससी./एम.टेक. के छात्र शामिल हैं।
विशेष बात यह है कि उच्च शिक्षा के इन क्षेत्रों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली है, जहां 196 छात्राओं को डिग्री प्रदान की जाएगी।

जलवायु परिवर्तन और शोध पर जोर
संस्थान की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए निदेशक ने कहा कि वर्तमान में ‘जलवायु परिवर्तन’ कृषि क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। संस्थान विद्यार्थियों को ऐसे शोध विषयों के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जो प्रतिकूल मौसम में भी किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो।
डॉ. राव ने गर्व से साझा किया कि देश के लगभग 70 प्रतिशत कृषि वैज्ञानिक आईसीएआर संस्थानों की ही देन हैं और आईएआरआई इस क्षेत्र में नेतृत्व कर रहा है।
121 वर्षों की शानदार विरासत
आईएआरआई की डीन डॉ. अनुपमा सिंह ने संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 121 वर्ष पुराने इस अग्रणी संस्थान ने कृषि शिक्षा और शोध में वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।
वर्तमान में आईएआरआई एक डीम्ड विश्वविद्यालय के रूप में 3,374 विद्यार्थियों को शिक्षित कर रहा है। संस्थान को ‘ए+’ ग्रेड का दर्जा प्राप्त है और इसके झारखंड व असम स्थित केंद्रों के माध्यम से उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी कृषि शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्लेसमेंट और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा
संस्थान केवल डिग्री तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां एक सक्रिय प्लेसमेंट सेल विद्यार्थियों को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित कर रहा है। साथ ही, संस्थान में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि यहां के छात्र नौकरी चाहने वालों के बजाय ‘रोजगार प्रदाता’ बन सके।



