नई दिल्ली: अक्सर छोटे बच्चों में सोते समय खर्राटे लेने या दिन भर मुंह से सांस लेने की समस्या देखी जाती है। इसे आम भाषा में ‘नाक के पीछे का मांस बढ़ना’ या मेडिकल भाषा में एडेनोइड्स (Adenoids) कहा जाता है। सीजीएचएस (CGHS) के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आबिर प्रमाणिक के अनुसार, अभिभावकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि होम्योपैथी में इसका सटीक और बिना सर्जरी वाला इलाज मौजूद है।
क्या है यह समस्या?
एडेनोइड्स हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली का हिस्सा होते हैं, जो नाक के बिल्कुल पीछे स्थित होते हैं। बार-बार सर्दी-जुकाम, प्रदूषण या एलर्जी के कारण इनका आकार बढ़ जाता है। इससे सांस लेने का रास्ता रुक जाता है, जिससे बच्चा नाक के बजाय मुंह से सांस लेने लगता है।
इन लक्षणों को पहचानें:
- सोते समय जोर-जोर से खर्राटे आना।
- नाक बंद रहना और आवाज का ‘नाकिया’ (Nasal Tone) हो जाना।
- बार-बार कान में दर्द या संक्रमण होना।
- नींद में बेचैनी और चेहरे की बनावट में बदलाव आना।
डॉक्टर की सलाह: बचाव और घरेलू नुस्खे
डॉ. प्रमाणिक ने सुझाव दिया है कि इलाज के साथ-साथ कुछ सावधानियां बरतकर बच्चे को राहत दी जा सकती है:
- परहेज: बच्चों को फ्रिज का पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम जैसी ठंडी चीजों से दूर रखें।
- साफ-सफाई: धूल और धुएं से बचाएं क्योंकि इससे सूजन बढ़ सकती है।
- हल्दी-दूध और भाप: रात को सोते समय हल्दी वाला दूध दें और बंद नाक खोलने के लिए नियमित भाप दिलाएं।
- अदरक-शहद: अदरक का रस और शहद मिलाकर चटाने से संक्रमण में राहत मिलती है।
होम्योपैथी: सर्जरी का प्रभावी विकल्प
डॉ. प्रमाणिक ने बताया कि एलोपैथी में अक्सर इसका समाधान सर्जरी (ऑपरेशन) बताया जाता है, लेकिन होम्योपैथी दवाओं जैसे एग्राफिस नूटन्स, बैराइटा कार्ब और कैल्केरिया कार्ब के जरिए इस समस्या को जड़ से ठीक किया जा सकता है। ये दवाएं न केवल सूजन कम करती हैं, बल्कि बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाती हैं।
चेतावनी: डॉ. प्रमाणिक ने स्पष्ट किया है कि कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना न लें, क्योंकि होम्योपैथी में दवा का चुनाव बच्चे की प्रकृति और शारीरिक बनावट को देखकर किया जाता है।



