नई दिल्ली: भारत सरकार ने 2025 में GST ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं, जो 22 सितंबर से लागू होंगे। इन सुधारों ने शिक्षा क्षेत्र, खासकर स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई को और किफायती बनाने का रास्ता खोला है। स्टेशनरी सामान जैसे पेंसिल, नोटबुक, रबर, शार्पनर, क्रेयॉन, चार्ट, मैप्स, स्लेट, चॉक और ब्लैकबोर्ड पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। पहले इन पर 5% से 12% तक जीएसटी लागू था, जिससे उनकी कीमतें बढ़ जाती थीं। अब टैक्स खत्म होने से ये सामान सस्ता होगा, जिसका सीधा फायदा माता-पिता और छात्रों को मिलेगा।
स्कूल फीस पर कोई टैक्स नहीं
सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों की फीस, परीक्षा शुल्क और स्कॉलरशिप सेवाएं पहले से ही जीएसटी से मुक्त थीं। नया सुधार इस नीति को बरकरार रखता है, जिससे बेसिक और हायर एजुकेशन की लागत पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि, प्रोफेशनल कोर्स, ऑनलाइन कोचिंग और निजी ट्यूशन पर 18% जीएसटी अब भी लागू रहेगा। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को लागत में राहत नहीं मिलेगी, जिससे निम्न-आय वर्ग के लिए यह चुनौती बनी रहेगी।
कितना सस्ता होगा स्टेशनरी सामान?
पहले 12% जीएसटी के साथ 500 रुपये का ग्लोब अब करीब 446 रुपये में मिलेगा। इसी तरह, नोटबुक, ड्राइंग बुक्स और अन्य स्टेशनरी सामान की कीमतें भी कम होंगी। यह बदलाव खासकर उन परिवारों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें हर महीने बच्चों के लिए पेंसिल, रबर जैसी छोटी-छोटी चीजें खरीदनी पड़ती हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह बजट में बड़ी राहत लाएगा।
नई GST दरें और उनका प्रभाव
पहले चार जीएसटी स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) थे, जिन्हें अब घटाकर 5% और 18% कर दिया गया है। लग्जरी और सिन गुड्स के लिए नया 40% स्लैब जोड़ा गया है। इससे रोजमर्रा की जरूरतों, जैसे स्टेशनरी, दवाइयां और घरेलू सामान की कीमतें कम होंगी। शिक्षा के क्षेत्र में यह सुधार बेसिक और मिडिल-स्कूल स्तर की पढ़ाई को और सुलभ बनाएगा।
शिक्षा को क्यों है यह जरूरी?
स्टेशनरी पर टैक्स खत्म होने से पढ़ाई-लिखाई का सामान सस्ता होगा, जिससे गरीब परिवारों के बच्चे बिना रुकावट शिक्षा जारी रख सकेंगे। यह सुधार भारत के 50% सकल नामांकन अनुपात (GER) के 2035 के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। हालांकि, हायर एजुकेशन में प्रोफेशनल कोर्स की लागत पर 18% टैक्स का बोझ बना रहेगा, जिसके लिए भविष्य में और सुधारों की जरूरत है।



