नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 56वीं GST काउंसिल बैठक में टैक्स ढांचे को सरल करते हुए सिर्फ 5% और 18% के दो स्लैब लागू किए, जो 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले से ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ी राहत मिली है। छोटी कारें, 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें, तिपहिया वाहन, ट्रक और एम्बुलेंस अब सस्ते होंगे, जिसका फायदा आम आदमी और उद्योगों को मिलेगा।
छोटी कारों पर टैक्स राहत
4 मीटर से छोटी कारों, जिनमें 1200 सीसी तक का पेट्रोल या 1500 सीसी तक का डीजल इंजन है, पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया है। इससे मारुति सुजुकी ऑल्टो, टाटा नेक्सन, किआ सॉनेट, हुंडई i10, i20, वेन्यू और ऑरा की कीमतें 7-8% तक कम होंगी। उदाहरण के लिए, टाटा नेक्सन (3,995 मिमी, 1.2L पेट्रोल/1.5L डीजल) अब सस्ती होगी, क्योंकि इसका इंजन और लंबाई नए टैक्स स्लैब के दायरे में आते हैं।
महिंद्रा थार: सस्ता या महंगा?
महिंद्रा थार का थ्री-डोर मॉडल (3,985 मिमी, 1.5L इंजन) 18% जीएसटी के दायरे में आएगा, जिससे यह किफायती होगा। लेकिन थार रॉक्स (4,428 मिमी, 2.0L इंजन) पर 40% टैक्स लगेगा, जिससे इसकी कीमत बढ़ेगी। खरीदारों को वेरिएंट चुनते समय सावधानी बरतनी होगी।
बाइक और स्कूटर की कीमतें घटीं
350 सीसी तक की मोटरसाइकिलों पर जीएसटी 28% से 18% हुआ है। हीरो स्प्लेंडर, होंडा शाइन, बजाज पल्सर, टीवीएस अपाचे और केटीएम ड्यूक जैसी बाइक सस्ती होंगी। लेकिन 350 सीसी से बड़ी प्रीमियम बाइक, जैसे रॉयल एनफील्ड की हाई-एंड मॉडल, पर 40% टैक्स से कीमतें बढ़ेंगी।
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ऑटो पार्ट्स और अन्य वाहन
तिपहिया वाहन, बस, ट्रक और एम्बुलेंस पर भी टैक्स 18% हो गया है। ऑटो पार्ट्स पर एकसमान 18% जीएसटी से रखरखाव सस्ता होगा, जिससे ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को भी फायदा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य
वित्त मंत्री ने कहा कि यह सुधार टैक्स सिस्टम की जटिलताओं को खत्म करेगा और ऑटो, कृषि और श्रम-आधारित क्षेत्रों को मजबूत करेगा। फेस्टिव सीजन से पहले यह कदम बिक्री बढ़ाने और मध्यम वर्ग को राहत देने में मदद करेगा।



