ग्लोबल विंड डे 2026: 100 GW और उससे आगे की ओर बढ़ते भारत के कदम!

भारत 15 जून 2026 को गोवा में ग्लोबल विंड डे कॉन्फ्रेंस' की मेजबानी कर रहा है, जिसका उद्देश्य देश में पवन ऊर्जा की रफ्तार को बढ़ाना है। मार्च 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 56.09 GW हो चुकी है, जिसके साथ भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। वर्ष 2030 तक 100 GW का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार ऑफशोर प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे रही है और मैन्युफैक्चरिंग में 70-80% तक आत्मनिर्भर हो चुकी है।

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नई दिल्ली। आज यानी 15 जून 2026 को पूरी दुनिया ग्लोबल विंड डे’ (Global Wind Day) मना रही है। इस खास मौके पर भारत के लिए गर्व की बात यह है कि देश इस साल गोवा में “विंड एनर्जी: एम्बिशन से एक्सीलरेशन तक” (Wind Energy: From Ambition to Acceleration) थीम के साथ ‘ग्लोबल विंड डे 2026 कॉन्फ्रेंस’ की मेजबानी कर रहा है। इस कॉन्फ्रेंस में CEA, SECI, IREDA, NIWE और ग्रिड इंडिया जैसी बड़ी संस्थाएं मिलकर भारत के पवन ऊर्जा (Wind Energy) के भविष्य का नया रोडमैप तैयार कर रही हैं।

भारत की पवन ऊर्जा: आंकड़ों में बड़ी छलांग

भारत आज पवन ऊर्जा (Installed Wind Capacity) के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर है। हमारी तरक्की की रफ्तार इन आंकड़ों से समझी जा सकती है:

  • 2.66 गुना की बढ़ोतरी: मार्च 2014 में जो क्षमता केवल 21.04 GW थी, वह मार्च 2026 तक बढ़कर 56.09 GW हो चुकी है!
  • रिकॉर्ड तोड़ कामयाबी: साल 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 6.05 GW नई क्षमता जोड़ी है।
  • आत्मनिर्भर भारत: विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 10 GW (2014) से बढ़कर 24 GW (2026) हो गई है, और इसके मुख्य पार्ट्स में हम 70-80% तक आत्मनिर्भर (Indigenisation) हो चुके हैं।

कहाँ है सबसे ज्यादा क्षमता? (Top 5 States)

150 मीटर की ऊंचाई पर भारत की कुल विंड पावर क्षमता 1,163.9 GW आंकी गई है, जिसमें मुख्य रूप से ये राज्य आगे हैं:

  1. राजस्थान: 284.2 GW
  2. गुजरात: 180.8 GW
  3. महाराष्ट्र: 173.9 GW
  4. कर्नाटक: 169.3 GW
  5. आंध्र प्रदेश: 123.3 GW

खास बात: हमारी कुल विंड जनरेशन का लगभग 45% हिस्सा पीक डिमांड (Peak Hours) के दौरान आता है, जो सोलर पावर के साथ मिलकर ग्रिड को मजबूती देता है।

सरकार के बड़े कदम और भविष्य का विजन

भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक 100 GW और 2036 तक 156 GW पवन ऊर्जा हासिल करना है। इसके लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं:

  • ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स: गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर 1,000 MW के ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स के लिए ₹6,853 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) को मंजूरी।
  • नई नीतियां: जनवरी 2026 में जमीनी और रेगुलेटरी चुनौतियों को सुलझाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन।
  • स्मार्ट ग्रिड: ग्रिड मैनेजमेंट के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित फोरकास्टिंग टूल्स का इस्तेमाल।

भारत अपनी तकनीक को और मजबूत करने के लिए दुनिया के अग्रणी देशों के साथ हाथ मिला रहा है:

  • यूके (UK): फरवरी 2026 में ‘इंडिया-यूके ऑफशोर विंड टास्कफोर्स’ की शुरुआत की गई।
  • डेनमार्क (Denmark): पावर सिस्टम मॉडलिंग और एक्सपर्ट ट्रेनिंग के लिए मई 2025 में समझौता रिन्यू किया गया।
  • बेल्जियम (Belgium): WEF 2026 में ऑफशोर विंड और ग्रीन टैक्सोनॉमी पर सहयोग को आगे बढ़ाया गया।

आगे की राह

पवन ऊर्जा सिर्फ एक स्वच्छ ईंधन का जरिया नहीं है, बल्कि यह भारत की औद्योगिक प्रगति, आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास का नया इंजन है। स्टोरेज सॉल्यूशंस (RTC Power), नए राज्यों (जैसे ओडिशा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश) में विस्तार और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करके भारत न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा तय कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर विंड टरबाइन का बड़ा एक्सपोर्टर बनने की ओर भी अग्रसर है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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