भू-राजनीतिक दबावों पर भारी ‘भारतीय रिफाइनिंग’: रूस से तेल आयात में रिकॉर्ड उछाल!

प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने मई में रूस से 5.8 अरब यूरो का ईंधन खरीदा और चीन (50%) के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा (36%) खरीदार बना रहा। पिछले महीने की तुलना में भारत के कुल तेल आयात में 8% और रूसी आयात में 21% की वृद्धि हुई, जिसमें वाडिनार (+36%) और विशाखापत्तनम (+42%) जैसी रिफाइनरियों का मुख्य योगदान रहा। यूरोपीय संघ और अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद, भारतीय जामनगर रिफाइनरी जैसी जगहों से रूसी कच्चे तेल से बने 214 मिलियन यूरो के उत्पाद सीधे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और EU को निर्यात किए गए। इस रियायती तेल की खरीद से भारत को अपनी घरेलू ऊर्जा लागत (महंगाई) को नियंत्रित करने में मदद मिली है और साथ ही रिफाइनिंग मार्जिन व पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भारी बढ़ावा मिला है।

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नई दिल्ली: वैश्विक प्रतिबंधों, पश्चिमी देशों की चेतावनियों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे दबाव को दरकिनार करते हुए, भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

यूरोप के प्रतिष्ठित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की मई 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब चीन के बाद रूसी ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।

प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने मई में रूस से 5.8 अरब यूरो का ईंधन खरीदा और चीन (50%) के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा (36%) खरीदार बना रहा। पिछले महीने की तुलना में भारत के कुल तेल आयात में 8% और रूसी आयात में 21% की वृद्धि हुई, जिसमें वाडिनार (+36%) और विशाखापत्तनम (+42%) जैसी रिफाइनरियों का मुख्य योगदान रहा। यूरोपीय संघ और अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद, भारतीय जामनगर रिफाइनरी जैसी जगहों से रूसी कच्चे तेल से बने 214 मिलियन यूरो के उत्पाद सीधे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और EU को निर्यात किए गए। इस रियायती तेल की खरीद से भारत को अपनी घरेलू ऊर्जा लागत (महंगाई) को नियंत्रित करने में मदद मिली है और साथ ही रिफाइनिंग मार्जिन व पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भारी बढ़ावा मिला है।

आइए समझते हैं कि इस भू-राजनीतिक खींचतान के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने कैसे नया रिकॉर्ड बनाया है और वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को बदल कर रख दिया है।

मई के आंकड़े: भारत की रणनीति और बड़ी छलांग

अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के तमाम दबावों के बावजूद, पिछले महीने के मुकाबले मई में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेजी का मुख्य कारण रूस से होने वाले आयात में आई 21 प्रतिशत की भारी उछाल है।

  • कुल आयात: भारत ने मई महीने में रूस से करीब 5.8 अरब यूरो (लगभग 6.7 अरब डॉलर) के जीवाश्म ईंधन का आयात किया।
  • कच्चे तेल की हिस्सेदारी: इस कुल आयात में अकेले कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत (4.8 अरब यूरो) थी।
  • अन्य उत्पाद: इसके अलावा भारत ने 550 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद और 429 मिलियन यूरो का कोयला भी रूस से खरीदा।

रिफाइनिंग हब्स पर रूसी तेल की ‘लहर’

गुजरात के जामनगर और वाडिनार जैसे निजी रिफाइनिंग दिग्गजों से लेकर देश की सरकारी तेल कंपनियों ने भी रूसी कच्चे तेल की आवक को तेजी से बढ़ाया है:

  1. वाडिनार रिफाइनरी (गुजरात): अप्रैल के मुकाबले मई में यहां रूसी तेल की अनलोडिंग में 36% की भारी वृद्धि हुई।
  2. जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स (रिलायंस): यहां रूसी तेल की डिलीवरी में 14% का इजाफा देखा गया। (पिछले 3 महीनों में जामनगर ने अपने कुल कच्चे तेल का 15% हिस्सा रूस से मंगाया है)।
  3. सरकारी रिफाइनरियों की वापसी: न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों (जिन्होंने नवंबर 2025 में आयात रोक दिया था) ने मार्च में दोबारा शुरुआत करने के बाद मई में अपनी खरीदारी और बढ़ा दी।
    • विशाखापत्तनम: आयात में 42% की रिकॉर्ड उछाल।
    • न्यू मैंगलोर: महीने-दर-महीने 13% की वृद्धि।
    • पारादीप रिफाइनरी (ओडिशा तट): पिछले दो वर्षों में रूसी कच्चे तेल की अपनी सबसे अधिक मात्रा यहां अनलोड की गई।

रूस से किसने कितना खरीदा तेल? (मई 2026 के वैश्विक आंकड़े)

रूसी कच्चे तेल के कुल निर्यात बाजार पर नजर डालें तो बाजार का 86% हिस्सा सिर्फ दो एशियाई दिग्गजों के पास है:

  • चीन: 50% (दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार)
  • भारत: 36% (दूसरा सबसे बड़ा खरीदार)
  • तुर्की: 6%
  • यूरोपीय संघ (EU): 5%

चीन का गणित: मई 2026 में चीन ने रूस से कुल 7.0 बिलियन यूरो (रूस की टॉप 5 देशों से कुल कमाई का 38%) का ईंधन खरीदा, जिसमें 69% कच्चा तेल (4.8 अरब यूरो) था, और बाकी पाइपलाइन गैस (618 मिलियन यूरो), कोयला (525 मिलियन यूरो) और एलएनजी (510 मिलियन यूरो) शामिल थे।

 प्रतिबंधों का ‘लूपहोल’: भारत से तेल खरीद रहे हैं अमेरिका और EU

CREA की रिपोर्ट ने एक बेहद दिलचस्प विरोधाभास को उजागर किया है। 21 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बावजूद, मई 2026 में रूसी तेल का इस्तेमाल करने वाली रिफाइनरियों से 10 तेल जहाजों की खेप सीधे EU के बंदरगाहों पर पहुंची।

भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने प्रतिबंध लगाने वाले देशों को कुल 641 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद भेजे, जिसमें से 214 मिलियन यूरो के उत्पाद सीधे तौर पर रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे।

रूसी कच्चे तेल से बने इन उत्पादों के शीर्ष खरीदार:

  • ऑस्ट्रेलिया: 275 मिलियन यूरो
  • यूरोपीय संघ (EU): 174 मिलियन यूरो
  • अमेरिका: 147 मिलियन यूरो
  • न्यूजीलैंड: 45 मिलियन यूरो

अमेरिका को यह निर्यात मुख्य रूप से भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जामनगर रिफाइनरी और तुर्की की स्टार व तुप्रास इजमित रिफाइनरियों से किया गया।

निष्कर्ष: भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?

यूक्रेन युद्ध के बाद बदले वैश्विक परिदृश्य ने भारत को एक मजबूत वैश्विक ऊर्जा खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया है। रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की लगातार खरीदारी से भारत को न केवल घरेलू स्तर पर उच्च ऊर्जा लागत (महंगाई) की भरपाई करने में मदद मिली है, बल्कि भारतीय रिफाइनरियों के रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भी जबरदस्त बढ़ावा मिला है।

यह साफ दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति पर चल रहा है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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