नई दिल्ली: गवर्नमेंट GEM पोर्टल (GEM) ने इतिहास रच दिया। महज 9 साल में इसका सकल व्यापारिक मूल्य (GMV) 15 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर कर गया है। इसका मतलब यह हुआ कि उपभोक्ता से उपभोक्ता के बीच कुल लेन-देन 15 लाख कराेड़ रुपये है। गौरतलब है कि GEM की स्थापना 2016 में हुई थी। तबसे यह GMV में तरक्की कर रहा है। यानी खरीदारों और विक्रेताओं का विश्वास इसमें बढ़ा है।
मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म बना
ये महज आंकड़े नहीं है बल्कि पारदर्शी, कुशल और समावेशी सार्वजनिक खरीद इको-सिस्टम की बानगी हैं। इससे जीईएम के दृष्टिकोण में पूरे भारत के खरीदारों और विक्रेताओं के विश्वास और भरोसे का उदहारण है।
खरीदारों और विक्रेताओं को एक मंच पर लाया
अपने नौ साल की यात्रा में जीईएम मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। इससे सरकारी खरीदारों और विक्रेताओं को बेहतरीन मंच मिला है। इससे सबसे ज्यादा सहूलियत सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई), स्टार्टअप, महिला-नेतृत्व वाले व्यवसाय, अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति के उद्यम और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) को मिली है।
‘विश्वास का प्रमाण है 15 लाख करोड़ का आंकड़ा’
जीईएम के सीईओ मिहिर कुमार ने कहा कि 15 लाख करोड़ रुपये के जीएमवी के आंकड़े को पार करना हमारे हितधारकों के जीईएम में रखे गए विश्वास का प्रमाण है। यह सफलता उन लाखों विक्रेताओं और खरीदारों की है जिन्होंने भारत में सार्वजनिक खरीद के तरीके को बदल दिया है। हमारा ध्यान समावेशिता को गहरा करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने पर बना रहेगा ताकि अवसर देश के हर कोने तक पहुंच सकें। हम सब मिलकर विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप एक पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल रूप से सशक्त खरीद इको-सिस्टम का निर्माण कर रहे हैं।
जवाबदेही भी है
मिहिर कुमार ने कहा कि जीईएम पर हर लेन-देन खरीद से कहीं इसकी दक्षता, जवाबदेही और सशक्तिकरण को दर्शाता है। प्रक्रियाओं को सरल बनाकर जीईएम ने उद्यमिता, नवाचार और समतामूलक विकास को बढ़ावा देते हुए अंतिम छोर तक पहुंचने के अवसर प्रदान किए हैं। प्रवेश बाधाओं को कम करके और नीति एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शिता को समाहित किया है।
खास बातें
- विभिन्न क्षेत्रों के लाखों विक्रेताओं के लिए सरकारी खरीद तक पहुंच का विस्तार करना।
- एमएसई, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी को मजबूत करना।
- खरीद के हर चरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप शासन में डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देना।
जीईएम भविष्य की ओर देख रहा है। इसका ध्यान भारत में सार्वजनिक खरीद में और अधिक परिवर्तन लाने के लिए समावेशिता को बढ़ाने के लिए नवाचार को मजबूत करने और दक्षता को बनाए रखने पर केंद्रित है।



